|
|
|
|
|
|
|
|
|
नागरिक अधिकार पत्र
पशुधन सेवा-हमारा संकल्प
हमारा ध्येय
हिमाचल प्रदेश पशु पालन विभाग प्रदेश के पशु पालकों के सर्वागीण विकास हेतु पूर्णरूप से समर्पित है। पशु पलकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए विभाग, पशुधन स्वास्थ्य, रोग-अन्वेषण,
रोग उपचार, चारा विकास, वैज्ञानिक ढंग से पशुधन प्रवन्धन एवं लुप्त हो रही देसी नस्ल की प्रजातियों के संरक्षण आदि कार्यक्रमों का संचालन कर रहा है। पशुधन संवधर्न के माध्यम से प्रत्येक
पशुपालक को स्वाबलम्बी बनाने और वर्ष भर निरन्तर आय व पौष्टिक आहार की प्राप्ति हेतु प्रयासरत है।
वर्ष 1948 में, जब हिमाचल प्रदेश बना, उस समय प्रदेश में केवल 9 पशु चिकित्सा संसथान थे। वर्तमान समय में विभाग द्वारा कुल 2196 पशु संस्थानों के माध्यम से पशु स्वास्थ्य एवं
पशुधन के विकास हेतु सेवायें प्रदान की जा रही है।
पशुपालन विभाग का स्वरुप व गतिविधियां |
| क्रम संख्या |
संस्थान का नाम |
संख्या |
संक्षिप्त कार्य का विवरण |
| क:पशु चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाएं |
| 1 |
पशु चिकित्सालय |
1 |
यह संसथान राजधानी शिमला में स्थित है। इसमें उच्च स्तरीय नैदानिक व विशेषज्ञ सुविधायें उपलब्ध है। मुख्यतः छोटे पशुओं के ईलाज के अतिरिक्त उच्च स्तर कीरोग अन्वेषण सेवायें प्रदान
की जाती है। |
| 2 |
पालीक्लीनिक |
7 |
इन संस्थानों में पशु शल्य चिकित्सा, मेडीसीन, पैथोलोजिस्ट व गायनीकोलाजिस्ट की विशेषज्ञ सुविधाएं प्रदान की जाती है। |
| 3 |
पशु चिकित्सालय |
45 |
रोग उपचार, रोग निरोधन, कृत्रिम गर्भधान, चारा विकास व विभाग द्वारा संचलित पशुधन विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना। |
| 4 |
उप मंडलिय पशु चिकित्सालय |
30 |
रोग उपचार, रोग निरोधन, कृत्रिम गर्भधान, चारा विकास व विभाग द्वारा संचलित पशुधन विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना| |
| 5 |
केन्द्रीय पशु औषधालय |
1761 |
प्राथमिक पशु उपचार, कृत्रिम गर्भधान, रोग निरोधन, बधियाकरण व पशु चिकित्सा अधिकारी की देख रेख में अन्य विभागीय कार्यक्रमों को कार्यन्वित करना। |
| पशु चिकित्सा संस्थानों की कार्य समयावधि |
| प्रत्येक कार्य दिवसः राजपत्रित अवकाशों को छोडकर 9:30 पूर्वाहन से 1:30 अपराहन तक तथा 2:00 से 4:00 अपराहन तक । आपातकालीन सेवायें हर
समय उपलब्ध होती है। |
| 1 |
राज्य पशु चिकित्सालय |
1 |
यह संसथान राजधानी शिमला में स्थित है। इसमें उच्च स्तरीय नैदानिक व विशेषज्ञ सुविधायें उपलब्ध है। मुख्यतः छोटे पशुओं के ईलाज के अतिरिक्त उच्च स्तर कीरोग अन्वेषण सेवायें प्रदान
की जाती है। |
| 2 |
पालीक्लीनिक |
7 |
इन संस्थानों में पशु शल्य चिकित्सा, मेडीसीन, पैथोलोजिस्ट व गायनीकोलाजिस्ट की विशेषज्ञ सुविधाएं प्रदान की जाती है। |
| 3 |
उप मंडलिय पशु चिकित्सालय` |
45 |
रोग उपचार, रोग निरोधन, कृत्रिम गर्भधान तथा अपने उप-मण्डल के अधीन कार्यरत संस्थानों का निरीक्षण व नियन्त्रण| |
| 4 |
पशु चिकित्सालय |
283 |
रोग उपचार, रोग निरोधन, कृत्रिम गर्भधान, चारा विकास व विभाग द्वारा संचलित पशुधन विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना। |
| 5 |
केन्द्रीय पशु औषधालय |
30 |
रोग उपचार, रोग निरोधन, कृत्रिम गर्भधान, चारा विकास व विभाग द्वारा संचलित पशुधन विकास के कार्यक्रमों को कार्यान्वित करना |
| 6 |
पशु औषधालय |
1754 |
प्राथमिक पशु उपचार, कृत्रिम गर्भधान, रोग निरोधन, बधियाकरण व पशु चिकित्सा अधिकारी की देख रेख में अन्य विभागीय कार्यक्रमों को कार्यन्वित करना। |
| पशु चिकित्सा संस्थानों की कार्य समयावधि |
| प्रत्येक कार्य दिवसः राजपत्रित अवकाशों को छोडकर 9:30 पूर्वाहन से 1:30 अपराहन तक तथा 2:00 से 4:00 अपराहन तक । आपातकालीन सेवायें हर
समय उपलब्ध होती है। |
| खः पशु प्रजनन कार्यक्रम |
| क्रम संख्या |
संस्थान का नाम |
संख्या |
संक्षिप्त कार्य का विवरण |
| 1 |
स्पर्म स्टेशन पालमपुर व अडुवाल (सोलन) (आई॰एस॰ओ॰ प्रमाणित) |
|
2उच्च गुणवत्ता के सांडो के सांडों के
वीर्य तृणों का गुणवत्ता नियन्त्र्युक्त उत्पादन तथा तृणों एवं तरल नत्रजन की नियमित आपूर्ति विभिन्न पशु संस्थानों में सुनिश्चित करना।
|
| 2 |
वीर्य कोष
चम्बा,सोलन (अडुवाल) ज्योरी, घणाहटी, पालमपुर, मण्डी तथा (ताल) हमीरपुर
|
7 |
ये संस्थान तरल नत्रजन व वीर्य तृणों की आपूर्ति विभिन्न पशु सस्न्थानों में सुनिश्चित करते हैं। |
| 3 |
गोजातीय पशु प्रजनन प्रक्षेत्र कोठीपुरा, पालमपुर व बागथन |
3 |
प्रजनन कार्य हेतु वीर्य विधायन प्रयोगशालाओं को उत्तम सांडों की आपूर्ति करना, जर्सी व होलस्टीन गायों की प्रदेश की जलवायु के अनुरूप उत्पादन क्षमता का अध्ययन करना तथा पशुपालकों
को उन्नत डेयरी पालन का प्रशिक्षण व प्रदर्शन प्रदान करना। |
| गः रोग अन्वेषण सेवाएं |
| 1 |
रोगव्यापिकीविद प्रयोगशाला
शिमला व मण्डी
|
1 |
विभिन्न रोगों का सर्वेक्षण करना, मुंह खुर रोगों के नमूनों की जांच करना। |
|
| 2 |
रोग अन्वेषण प्रयोगशाला
शिमला व मण्डी
|
2 |
ये प्रयोगशालायें प्रदेश में पशु रोगों के निदान का कार्य आधुनिकतम तकनीकों द्वारा प्रदान कर रही है। |
| घ: भेङ व खऱगोश पालन |
| 1 |
भेङ प्रजनन प्रक्षेत्र/ मेढा केन्द, ज्योरी, काकस्थल (किन्नौर), ताल (हमीरपुर) चम् व नगवाई (मण्डी) |
5 |
मुख्य उददेशय उत्तम विदेशी
नस्ल के मेढों की प्रजनन हेतु आपूर्ति भेङ पालकों को करवाना।
|
| 2 |
भेङ व ऊन विसतार केन्द्र |
9 |
दूर दराज क्षेत्रोँ में भेङ पालकों को प्रजनन हेतु उत्तम नस्ल के मेढें उपलब्ध करवाना। |
| 3 |
खरगोश प्रजनन प्रक्षेत्र नगवाई (मण्डी) व कंढवाडी (पालमपुर) |
2 |
मुख्य उददेशय उत्तम अंगोरा नस्ल के खरगोशों का प्रजनन, खरगोश पालकों को प्रशिक्षण तथा उपलब्धता अनुसार उन्हें अंगोरा खरगोशों की आपूर्ति करना। |
| 4 |
ऊन विश्लेषण प्रयोगशाला
:: ज्योरी ताल (हमीरपुर)
चम्बा::
|
3 |
इन प्रयोगशालाओं में ऊना की गुणवत्ता के विश्लेषण हेतु
सुविधा उपलब्ध है।
|
| ड०: कुक्कुट पालन |
| 1 |
कुक्कुट प्रक्षेत्र
: सुन्दरनगर, नाहन, कमलाही (शिमला) जलग्रां (ऊना), पालमपुर
|
5 |
इन फर्मों में उच्चकोटि के ब्रायलर एवं एग्ग्र के पेरेंट स्टाक के अण्डों को हैच पोषण कर कुक्कुट पालकों को एक से तीन सप्ताह के चूजों की आपूर्ति की जाती है तथा कुक्कुट पालकों को
कुक्कुट सम्बन्धी व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया जाता है| |
| 2 |
कुक्कुट विस्तार केन्द्र
भवारना, पीओ,टापरी,चौतड़ा,मंडी, पांवटा व् सोलन व् सरोल (चम्बा)|
|
8 |
इन संस्थानों में उच्च नस्ल के चूजों, ब्रायलर एवं एग्गर का पालन व वितरण किया जाता है| |
| च: |
प्रजनन एवं याक प्रजनन प्रक्षेत्र लरी (सि्प्ति) |
1 |
चामूर्थी नस्ल के घोड़ों तथा याकों क प्रजनन एवं संरक्षण करना| |
| छ: |
प्रशिक्षण केन्द्र
चम्बा व बिलासपुर
|
2 |
इन केन्द्रों में पशुपालकों एवं विभागीय फार्मसिस्टों के लिए नवीनतम जानकारी व प्रशिक्षण की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती है| |
| झ: |
गोसदन सेवाएं
::खज्जियां (काँगड़ा) लैहरी-बरेटा (बिलासपुर), बनुरी(कांगड़ा)
|
3 |
इन संस्थानों में अपाहिज, नाकारा व बांझ पशुओं का भरण पोषण किया जाता है| |
विभागीय शुल्क दरें:-
पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश, द्वारा दी जा रही विभिन्न सुविधाओं के लिए सरकार द्वारा निर्धारित वर्तमान दरें निम्नलिखित हैं|
1. पर्ची शुल्क: क: पशु - 25 पैसे प्रति पशु
ख: कुक्कुट- 25 पैसे प्रति 10 पशु
(उसके उपरांत5 पैसे प्रति पक्षी)
2. बधियाकरण शुल्क सांड – 50 पैसे प्रति
बकरा/मेंढ़ा- 40 पैसे प्रति
घोड़ा - 10 रु० प्रति
कुत्ता - 5 रु० प्रति
3. कृत्रिम गर्भधान शुल्क:
गाय/भैंस - 15 रु० प्रति गाय/भैंस (गरीबी रेखा से उपर परिवारों के लिए
10 रु० प्रति गाय/भैंस (गरीबी रेखा से नीचे परिवारों के लिए)
4. आगमन शुल्क:(केवल पशु औषधियोजकों/पशुपालक सहायकों/ मुख्य पशु औषधियोजकों के लिए)
पशुपालकों के घर-द्वार पर उपचार एवं कृत्रिम गर्भधान की सुविधा उपलब्ध करवाने पर सरकार द्वारा निम्न आगमन शुल्क की दरें पशु औषधियोजकों/पशुपालन सहायकों के लिए निर्धारित की गई
है:-
| पशु चिकित्सा संस्थान से दूरी |
पशु औषधियोजक |
पशुपालन सहायक व मुख्य पशु औषधियोजक |
| (1) 3 कि.मी. तक |
30 रु० |
35रु० |
| (2) 3 कि.मी. से अधिक |
35 रु० |
40 रु० |
टिप्पणी:- पशु चिकित्सा अधिकारियों को पशुपालकों द्वारा आगमन शुल्क देय नहीं है, क्योंकि उनको प्रैक्टिस निषेध भत्ता (एन०पी०ए०) सरकार द्वारा दिया जाता है|
5.रोग निरोधक टीकाकरण शुल्क:
| क्रम संख्या |
रिग निरोधक टीके का नाम |
शुल्क |
| 1 |
मुंह व खुर |
नि:शुल्क |
| 2 |
ए०आर०वी० कुत्तों के बचाव के लिए |
पूरी कीमत पर |
| 3 |
गलघोंटू |
नि:शुल्क |
| 4 |
लंगड़ा बुखार |
नि:शुल्क |
| 5 |
पी०पी०आर०रोग |
नि:शुल्क |
टिप्पणी- पशुओं को पागल कुत्ते के काटने पर उपचार हेतु ए०आर०वी० टीकारण निशुल्कः किया जाता है|
केन्द्रीय प्रयोजित परियोजनाएं:
पशुपालन विभाग (हि०प्र०) निम्न प्रयोजित परियोजनाओं को भी कार्यान्वित कर रहा है:-
1. गाय व भैंस प्रजनन की राष्ट्रीय परियोजना:
भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत पोषित इस महवपूर्ण परियोजना के अन्तर्गत दुधारू पशुओं का नस्ल सुधार करने हेतु पशु पालकों को उनके घर द्वार पर उत्तम गुणवत्ता की प्रजनन सुविधा उपलब्ध
करवाई जा रही है ताकि अधिक प्रजनन योग्य गाय/भैंसों को हिमिकृत वीर्य तकनीक से क्रत्रिम गर्भधान सुविधा उप्ल्द्ध करवाई जा सके| जहां कृत्रिम गर्भधान हेतु उत्तम नस्ल के सांड उपलब्ध
करवाये जा रहे हैं|
2. केन्द्रीय दुधारू पशु योजना:
यह योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 2006-7 से ज़िला मंडी व कांगड़ा के दुधारू पशुओं के बीमा करवाने हेतु आरंभ की गई है तथा वर्ष 2008-9 से ज़िला हमीरपुर व शिमला भी इस योजना
में सम्मिलित कर दिये गये हैं| इस योजना के अन्तर्गत दुधारू पशु के बीमा प्रिमियम की राशी का 50 प्रतिशत भाग केन्द्र सरकार वाहन करती है तथा बाकि राशि पशु पालक द्वारा दी जाती
है|
3.एकीकृत दुग्ध विकास परियोजनाएं:
विभिन्न उत्तम पशु प्रबन्धन तकनीकों द्वारा अधिक दुग्ध उत्पादन से ग्रामीण अर्थव्यवस्था में उन्नति लाने हेतु प्रदेश के पांच जिलों (सोलन, मंडी, हमीरपुर, चम्बा एवं कांगड़ा) में ये
परियोजनाएं विभाग द्वारा डी०आर०डी०ए के माध्यम से कार्यान्वित की जा रही है|
4. एकीकृत ऊन सुधार परियोजना:
भेड़ पालकों की गद्दी नस्ल की भेड़ों की नस्ल तथा ऊन में सुधार के लिए यह परियोजना प्रदेश के ज़िला चम्बा, कांगड़ा व कुल्लू में हिमाचल प्रदेश ऊन प्रसंघ के माध्यम से विभाग द्वारा कार्यान्वित
की जा रही है| भारत सरकार द्वारा शत-प्रतिशत पोषित इस परियोजना में भेड़ पालकों को उत्तम नस्ल के मेंडे, आवश्क दवाईयां तथा ऊन विपणन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाती
है|
5. केन्द्रीय भेड़ पालक बीमा योजना:
इस योजना के अन्तर्गत भेड़ पालकों से 330/- रूपये की प्रीमियम राशि में से केवल 80/- रूपये लेकर प्राकृतिक तथा दुर्घटना कारणवश मृत्यु/विकलांगता के लिए उनका बीमा किया जाता है|
इसके अतिरिक्त बीमाकृत भेड़ पालक के नौंवी से बाहरवीं तक कक्षाओं में पढ़ने वाले दो बच्चों को 100/- रूपये प्रति माह कई डर से छात्रवृत्ति भी प्रदान की जाती है|
6. रष्ट्रीय पशु प्लेग (महामारी) उन्मूलन परियोजना:
केन्द्रीय प्रयोजित पशु प्लेग (महामारी) उन्मूलन परियोजना विभाग द्वारा पूरे प्रदेश में कार्यान्वित में की जा रही है|
7.पशु रोगों के नियन्त्रण के लिए प्रदेशों को सहायता योजना (एसकैड):
इस केन्द्रीय प्रयोजित योजना के अन्तर्गत पशुओं के प्रमुख संक्रामक रोगों (मुंह-खुर रोग, गलघोंटू, लंगड़ा बुखार, पी०पी०आर० रोग, रेबीज़ आदि) के टीकाकरण, नियन्त्रण एवं निगरानी
का कार्य पूरे प्रदेश में संचालित किया जा रहा है|
विस्तार सेवाएं:
पशुपालन विभाग, हिमाचल प्रदेश , पशु पालकों को पशु पालन सम्बन्धी नवीनतम जानकारी उपलब्ध करवाने हेतु प्रशिक्षण शिविरों, पशु प्रदर्शनी और पशु-मेलों का आयोजन करता है|
आकाशवाणी तथा दूरदर्शन के माध्यम से पशु सम्बन्धी नवीनतम जानकारी उपलब्ध करवाई जाती है | इसके अतिरिक्त विभागीय प्रक्षेत्रों में पशु पालकों को पशु पालन सम्बन्धी व्यवहारिक प्रशिक्षण
की व्यवस्था भी की गई है|
परिवीक्षण एवं मूल्यांकन:
निदेशक, पशु पालन के नेतृत्व में संयुक्त निदेशकों, मूल्यांकन किया जाता है|
शिकायत सूचना प्रबन्धकीय प्रणाली (एम०आइ०एस०)
पशु पालन विभाग की सेवायें पूर्णरूप से नागरिकों की अपेक्ष के अनुरूप हो सकें तथा सेवाओं में प्रदर्शिता जवाबदेही एवं गुणवत्ता में वृद्धि लाने हेतु नागरिको का सहयोग अपेक्षित है| इस हेतु पशु
पालक अपने सुझावों/शिकायतों के लिए विभिन्न स्तरों पर निम्नलिखित अधिकारियों से संपर्क करें-
| 1 |
उप-मंडलीय स्तर पर |
सम्बन्धित वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी |
| 2 |
ज़िला स्तर पर |
सम्बन्धित जिले में कार्यरत उप-निदेशक (पशु स्वस्थ्य/प्रजनन) तथा उप मण्डल पालमपुर, भरमौर, कज़ा तथा पांगी में कार्यरत सम्बन्धित सहायक निदेशक से संपर्क करें| |
| 3 |
मण्डल स्तर पर
दक्षिण क्षेत्र
( शिमला, सोलन, सिरमौर, किन्नौर , बिलासपुर व ऊना जिले तथा स्पिति उप मण्डल)
उत्तरी क्षेत्र
(कांगड़ा,हमीरपुर, चम्बा, मण्डी, कुल्लू, लाहौल ज़िला तथा पांगी उप मण्डल) |
संयुक्त निदेशक, एस०एल०बी०पी०, निदेशालय, पशुपालन विभाग शिमला-170005, हि०प्र० संयुक्त निदेशक, पशु पालन पालमपुर
दूरभाष-01894-230529
|
| 4 |
निदेशालय स्तर पर |
निदेशक, पशुपालन विभाग, हि०प्र०
दूरभाष/फैक्स-0177-2830089/0177-2830167
|
विभिन्न स्तरों पर शिकायतों के निवारण हेतू निर्धारित अवधि इस प्रकार हैं:-
| कार्यालय स्तर |
शिकायत का प्रकार |
शिकायत निवारण के लिए अधिकतम समय |
| प्रत्येक जिले में कार्यरत उप निदेशक, पशु स्वस्थ्य प्रजनन और पांगी भरमौर व कज़ा में कार्यरत सहायक निदेशक |
1. दवाइयों की कमी
2.. उपकरणों की कमी
3. बीमारियों की रिक्थाम व नियन्त्रण उपाय
4. बीमारियों की रिक्थाम हेतू टीकाकरण
5.स्टाफ की अनुपस्थिति बारे
6. बीमार पशुओं के इलाज बारे
7. ज़िला में कृत्रिम गर्भाधान पदार्थों की अनोपलब्धता बारे
8. सटाफ द्वरा अनुचित इलाज करने बारे
9. रिपीट ब्रीडिंग समस्या बारे
10.मृत्यु एवं शव परीक्षण प्रमाण पत्र प्रदान प्रदान न करने बारे
11. बीमा देय राशि सहायता न करना
12. सटाफ द्वारा की जा रही अनियमितताओं बारे
13. रिक्त स्थान पर स्टाफ उपलब्ध करवाने हेतु
14. कैम्पों के आयोजन बारे
15. चारा, बीज, जड़े, पौधों को उपलब्ध करवाने हेतु
16. जहां कृत्रिम गर्भाधान सुविधा उपलब्ध नहीं वहां प्रजनन हेतू सांड एवं मैंढे उपलब्ध करवाने बारे
17. कर्मचारियों की शिकायतें
|
एक सप्ताह
एक माह
दो माह
एक माह
दो सप्ताह
दो सप्ताह
एक सप्ताह
दो दिन
एक माह
एक सप्ताह
एक माह
एक सप्ताह
एक माह
एक माह
एक माह
एक माह
एक माह
|
| संयुक्त निदेशक |
1. ज़िला स्तर पर उपरोक्त शिकायतों प्र कार्यवाही न करने बारे
2. महामारी के नियन्त्रण बारे शिकायतें
3. मण्डल में विभिन्न बीमारियों की रिक्थाम हेतू टीकाकरण बारे
4. मण्डल में कैम्पों के आयोजन हेतू टीमों का गठन करने बारे
5. खाली पड़े पदों पर स्थानीय प्रबंध करने हेतु
|
दो सप्ताह
दो दिन
एक माह
एक माह
एक माह
|
| निदेशक |
1. शिकायतें जिनकी सुनवाई ज़िला व मण्डल स्तर पर नहीं हुई
2. स्टाफ की रिक्तियों बारे
3. फर्नीचर , उपकरण, दवाईयों
4. स्टाफ के कारण उत्पन्न
5. स्टाफ की व्यथा
|
दो सप्ताह
एक माह
एक माह
एक माह
एक माह
|
|
|
|
| |
|

|
|
|
|
|
|
|
|
|