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दूध गंगा योजना
- दूध गंगा योजना का शुभारम्भ माननीय मुख्यमंत्री हि॰प्र॰, प्रो॰ प्रेम कुमार धूमल द्वारा दिनाकं 25-09-09 को पपलोटा ज़िला सोलन से किया गया| पशुपालकों द्वारा इस योजना को अपनाने में बहुत उत्साह दिखाया गया है तथा माह मई 2010 तक इस यिजना के अन्तर्गत 1586 लाभार्थियों को रु.15.10 करोड़ का ब्याज मुक्त ऋण प्रदान किया जा चुका है|
- इस योजना द्वारा विभाग का प्रदेश में अच्छी नस्ल के दुधारू पशुओं की संख्या तथा दूध उत्पादन में बढौतरी करने का लक्ष्य है|
- इस योजना के कार्यान्वयन से ग्रामीण क्षेत्रों में दूध से बने उत्पादकों के विक्रय से महिलाओं को आर्थिक आज़ादी देकर सशक्त बनाना|
- उपरोक्त योजना राशि का 50 प्रतिशत भाग ब्याज मुक्त खा गया है तथा यदि व्यक्ति विशेष या समूह द्वारा नियमित रूप से ऋण की अदायगी की जाती है तो ब्याज राशि प्र भी 50 प्रतिशत अनुदान देने का प्रावधान है|
- इस योजना में व्यक्तिगत या सामूहिक तौर पर|
- अधिकतम 10 दूधारू पशु खरीदने के लिए तीन लाख रुपये का ऋण नाबार्ड व राष्ट्रीयकृत बैकों द्वारा उपलब्ध करवायें जाने का प्रावधान है|
- दूध नीक्लने की मशीनें व दूध कूलर इत्यादि स्थापित करने हेतू 15 लाख रूपय तक का ऋण देने का प्रावधान है|
- दूध के देशी उत्पादन बनाने की इकाईयां स्थापित कर्नर हेतू 15 लाख रुपय तक का ऋण देने का प्रावधान है|
- दूध उत्पादकों के परिवाहन हेतू 25 लाख रूपय तक के ऋण प्रदान करने का प्रावधान है|
- इन सभी प्रकार के ऋणों में 10 प्रतिशत राशि का भुक्तान व्यक्ति विशेष या समूह द्वारा व 90 प्रतिशत राशि का भुगतान नाबार्ड व राष्ट्रीयकृत बैकों द्वारा अदा किया जाएगा|
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दूध गंगा योजना को सुचारू रूप से कार्यन्वित करने हेतू प्रत्येक ज़िला में उपायुक्त की अध्यक्षता में अनुश्रवण समिति का गठन किया गया है जिसमें की नाबार्ड बैंक, ज़िला के अन्य अग्रणी बैंक, हिमाचल प्रदेश मिल्क फैड तथा पशुपालन विभाग के अधिकारी सदस्य हैं| इस समिति द्वारा नियमित तौर पर इस प्रयोजना का पुनरीक्षण किया जा रहा है|
परियोजना के अंतर्गत लाभार्थियों को दुधारू पशुओं के प्रबन्ध के बारे में उप मंडलीय पशु चिकित्सा संस्थानों में प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है| इस प्रशिक्षण के दौरान पशुपालन विभाग नाबार्ड बैंक तथा हिमाचल प्रदेश मिल्क फैड के अधिकारी मिलकर पशुपालकों को योजना की जानकारी तथा पशुओं के वैज्ञानिक प्रबंधन के बारे में जानकारी उपलब्ध करवाते हैं|
बैंकों से ऋण लेने हेतू औपचारिकताओं सम्बन्धी जानकारी
- इस परियोजना के अन्तर्गत कोई भी एक आवेदक या स्वयं सहायता समूह के सदस्य किसी भी सहकारी/राष्ट्रीयकृत बैंक से दुधारू पशु खरीदने हेतू ऋण के लिए आवेदन कर सकते हैं|
- कोई भी एक आवेदक या स्वयं सहायता समूह का प्रधान व सचिव अपने नज़दीक के पशु चकित्सा अधिकारी से प्रोजैक्ट रिपोर्ट (Project Report) लेकर सम्बन्धित बैंक में जमा करें|
- प्रोजैक्ट रिपोर्ट के साथ ही स्वयं सहायता समूह द्वारा ऋण लेने हेतु प्रस्ताव, अधिकार पत्र (पैसे के लेन-देन बारे) स्वयं सहायता समूह की मोहर का नमूना और स्थानीय बैंक का अनापत्ति प्रमाण पत्र (N.O.C.) भी संलग्न करें|
- बैंक का करार पत्र (Inter-se-Agreement) पांच रूपये के स्टांप पेपर पर टाईप करवाकर स्वयं सहायता समूह के सभी सदस्यों द्वारा बैंक में हस्ताक्षरित करना होगा|
- यदि कोई अकेला आवेदक इस परियोजना के तहत ऋण लेना चाहे तो उसे 50,000/-रुपये से अधिक के ऋण की गारंटी जमीन के कागज़ात के रूप में देनी होगी और 10/- रूपये के स्टांप पेपर पर करार पत्र भी देना हिगा|
- स्वयं सहायता समूह को ऋण खाते में 10 प्रतिशत उपांत राशि (Margin Money) जमा करवानी होगी|
- यह सभी औपचारिकतायें पूर्ण करने के उपरान्त बैंक द्वारा ऋण की स्वीकृति दी जाएगी| जहां पर कोई मिल्क रूट नहीं होंगे| इन्हें उपलब्ध करवाने में पशुपालन विभाग पशुपालकों का सहयोग करेगा|
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