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ट्राउट मछली पालन

(क्या करें, क्या न करें)



कृषक मार्गदर्शिका


  1. उसी मछली या अण्डे का क्रय करना चाहिए जिसका स्वास्थ्य स्तर, स्वास्थ्य केन्द्रों द्वारा प्रमाणित हो,

  2. एक रेस्वे में मछलियों की उचित संख्या होनी चाहिए | मछलियों के उत्पादन के लिए पानी में उनका संग्रहण 4 से 5 कि०ग्रा० प्रति वर्ग मीटर की दर से किया जाता है | 25 लीटर/प्रतिमिनट/प्रति वर्गमीटर पानी का बहाव/मात्रा उपयुक्त मानी जाती है | ट्राउट मत्स्य पालन केन्दों पर जहां खाने के लिए उत्पादन किया जाता है वहां संग्रहण क्षमता में फेरबदल संभव है,

  3. उपयुक्त भोजन मछलियों के अछे स्वास्थ्य व उपयुक्त आर्थिक लाभ के लिए आवश्यक है,

  4. रेसेवे में नियमित रूप से सफाई होनी और उपकरण भी संक्रमण रहित होने चाहिए | प्रत्येक रेसवे के लिए अलग-अलग उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए,

  5. मछली पालन के लिए पानी का स्त्रोत हर तरह के संक्रमण से रहित होना चाहिए (जैसे मल-मूत्र या दूसरे रेस्वे का पानी,

  6. मछलियों से अनावश्यक छेड छाड़ नहीं करनी चाहिए | मछलियों का स्थानान्तरण व मछलियों की छंटाई यथा संभव सावधानी से तथा पानी में ही करनी चाहिए,

  7. मछलियों का नियमित रूप से स्वास्थ्य परीक्षण होना चाहिए,

  8. आवश्यकता पड़ने पर ही परजीवी नाशक तथा उनके सुरक्षात्मक तरीकों का प्रयोग करना चाहिए,

  9. बीमार मछलियों का उचित इलाज होना चाहिए,

  10. पुन: रेसवे को मछलियों की नई फसल के लिए प्रयोग करने से पूर्व पूरी तरह से खाली और संक्रमण रहित कर लेना चाहिए|



उसी मछली या अण्डे का क्रय करना चाहिए जिसका स्वास्थ्य स्तर, स्वास्थ्य केन्दों द्वारा प्रमाणित हो | बेचे जाने वाले अथवा परिवहन किये जाने वाले अण्डों का स्वास्थ्य प्रमाण पत्र साथ होना चाहिए ताकि उनके उत्पादन स्त्रोत तथा शावजनकों के स्वास्थ्य पर भी नियुक्त स्वास्थ्य विशेषज्ञ द्वारा नजर रखी जा सके | अण्डों को सेने से पहले या उन्हें दूसरे केन्द्रों में छोटी मछलियों की अवस्था में ले जाने से पहले संक्रमण रहित कर लेना चाहिए |


अंडा/ मछली अंगुलिकाओं के क्रय करने वाले को यह सुनिश्चित कर लेना चाहिए कि अण्डे/मछलियाँ पूरी तरह से संक्रमण रहित है | हैचरी में शावजनक मछलियों को ले जाना या संग्रहण करना निषेध है | शावजनक भले ही बाहय रूप से स्वस्थ्य दिखाई देते हों फिर भी उनमें बैक्टेरिया या वायरस जैसे रोग फैलने वाले रोगाणू हो सकते हैं | जो शावजनक अण्डा देने से पूर्व मर जाते हैं उनका गहन परीक्षण आवश्यक है | रोगी शावजनक मछलियों को प्रजनन में प्रयोग नहीं करना चाहिए |


वैकटेरिया से होने वाली गुर्दे की बीमारी तथा अग्नाष्य सदन जैसी बीमारियाँ एक मछली से दूसरी मछली में ही नहीं फेलती है अपितु शावजनक मछलियों से अण्डों में भी सीधे चली जाती हैं | मछलियों में बीमारियों का पता लगाने के लिए मरी हुई मछलियों का जीवित की तुलना में परीक्षण अधिक उपयोगी रहता है|



मछली अण्डों का विसक्रमण :-


विसक्रमकों जैसे आइडोफोर यधपि वाहय रूप से आँख वाले निषेचित अण्डों को रोगाणू मुक्त कर लेते हैं परन्तु कुछ वैक्टेरिया जो शावजनकों से सीधे अण्डों में चले जाते हैं, जैसे कि रानीवैक्टीरियम तथा वायरस, जैसे कि अग्नाष्य सडन वायरस आदि फिर भी अण्डों में जीवित रह सकते हैं |


विसक्रमण प्रयोग के लिए अनुकूल परिस्थितियाँ :-


आईडोफोरेज जैसे विसक्रमकों के प्रयोग के लिए पानी की पीएच 6 से 8 के बीच होनी चाहिए | 6 से कम पी एच पर पानी आँख वाले निषेचित अण्डों के लिए जहरीला जो जाता है तथा 8 या अधिक पी एच पर संक्रमण प्रभावहीन होने लग जाते हैं | अत: पानी की पी एच पर नियंत्रण रखना आवश्यक है | कम पी एच होने पर पानी में 100 मिलीग्राम/लीटर दर से मीठा सोडा मिलादेना उपयोगी रहता है | अण्डों का विसक्रमण पूर्व व बाद में उन्हें स्वच्छ जल से धोना तथा आयोडीन को सोडियम थायोसल्फेट से निषकृय कर देना चाहिए | आईडोफोर घोल बनाने में प्रयुक्त होने वाला पानी स्वच्छ होना चाहिए | 100 मिलीग्राम/लीटर की सधनता के विसक्रमक में अण्डों को कम से कम 10 मिनट तक रखना चाहिए तथा घोल को केवल एक बार ही प्रयोग करना चाहिए | सालमन (ट्राउट) प्रजाति के अण्डों को निषेचन के तत्काल बाद विसक्रमण के लिए विसक्रमण की सधनता 50 मिलीग्राम/प्रति लीटर तथा विसक्रमण समय कम से कम 30 मिनट होना चाहिए | अन्य मछली प्रजाति के अण्डों के विसक्रमण के लिए आईडोफोर की सधनता व समय की जांच की आवश्यक है | जिन अण्डों का परिवहन किया गया हो उनकी पैकिंग का या तो विसक्रमण या उसे नष्ट कर देना चाहिए |


विसक्रमण प्रयोग से पूर्व कुछ सावधानियां आवश्यक हैं क्योकि बाजार में मिलने वाले कुछ विसक्रमकों में शोधक तत्वों (डीटरजैटस) की मिलावट होने के कारण वै जहरीले प्रभाव देते हैं अत: प्रयोग से पूर्व इनकी जांच की जानी आवश्यक है |


आयोडीन के प्रयोग से विभिन्न मछली प्रजातियों का विसक्रमण संभव है परन्तु अधिकतर इसका प्रयोग सालमन मछली पर ही किया जाता है |


विसक्रमण की सक्षमता :-


शावजनक मछलियों से सीधे अण्डों का संक्रमण करने वाले संक्रमण रोग जैसे अग्नाश्य सडन रेनीवैक्टीरियोसिस तथा हिमेटोपवाईटिक नेक्रोसिस आदि की रोकथाम आयोडीन प्रयोग से संभव नहीं है |


रोगों से रोकथाम के लिए मछली टैंक/रेसवेज की नियमित साफ सफाई तथा उनका विसक्रमण करना चाहिए | विभिन्न मछली वर्गों के लिए अलग-अलग उपकरणों का प्रयोग करना चाहिए |


उपकरण :-


मछली बीमारी के फैलने की दृष्टि से प्रत्येक टैंक/रेस्वेज के लिए अलग जाल व ब्रश का प्रयोग करने पर उसे अलग इकाई बना देता है | यदि संभव हो तो अलग-अलग रेस्वेज के लिए अलग-अलग रंगों के जाल व ब्रशों का प्रयोग करना चाहिए |


मछली पालन की समस्त गतिविधियों जैसे आहार, मछली या अण्डा परिवहन आदि में प्रयोग होने वाले हर उपकरण को रोगाणूनाषक प्रक्रिया से गुजरना आवश्यक है | यदि विभिन्न इकाईयों के लिए अलग-अलग उपकरण संभव न हो तो एक इकाई का उपकरण दूसरी इकाई में प्रयोग से पूर्व उसका 10 मिनट तक विसक्रमण आवश्यक हैं |


मृत अथवा बीमार मछली :-


तालाब/रेसवेज के धरातल पर पड़ी मृत मछलियों में वैक्टेरिया वायरस तथा अन्य परजीवी/सूक्ष्म जीव होते हैं अत: उन्हें जितना शीघ्र हो सके बाहर निकाल देना चाहिए | इस कार्य में तत्परता से मछली बीमारी फैलने का भय नहीं रहता है | हर 24 घंटे में यह प्रक्रिया कम से कम एक बार अवश्य दोहराई जानी चाहिए तथा मरी हुई मछलियों का तेज़ाब अथवा चुने से उपचार उपरान्त उन्हें गहरे गढे में दबा देना चाहिए | उपचारित मरी मछली/अथवा उसके घोल की पीएच 4 से अधिक नहीं होनी चाहिए |


ऐसी मछलियों जिनके गलफडे बीमारी से क्षतिग्रस्त हों अथवा जिनमें परजीवी हों उनमें संक्रमण रोग फैलने की आशंका रहती है तथा वे रोग भंडार व बीमारियों के जीवाणू पोषण का काम करती है | ऐसी मछलियों को समय रहते नष्ट करना ही उपयोगी माना गया है |



मछली आहार :-


मछली आहार का भंडारण अन्य उपकरणों से अलग करना चाहिए तथा उसकी चूहों व पक्षियों से सुरक्षा व्यवस्था भी आवश्यक है | फार्म के लिए बाहर से तथा फार्म के भीतर आहार परिवहन बीमारी फैलने का कार्य कर सकता है | अत: इस कार्य को कड़ी व नियमित दिनचर्या के अधीन किया जाना चाहिए | अंगुलिका आहार यंत्रों की रोजाना सफाई, तथा पुराने आहार के अंशों को नष्ट करना आवश्यक है | आहार यदि उपयुक्त तापमान पर न बनाया जाए या उसका निर्माण उपरांत संक्रमण हो जाएँ तो वह स्वयं ही रोगाणू फैलने का स्त्रोत बना जाता है |


सुनिश्चित करें कि फार्म में आने वाला पानी हर प्रकार के प्रदूषण से मुक्त है | विभिन्न सूक्ष्म जीवों की जल में जीवित रहने की यधपि क्षमता भिन्न-भिन्न है फिर भी पानी को संक्रमण का सदैव मुख्य स्त्रोत की माना जाना चाहिए | जल स्त्रोत जंगली मछली से सुरक्षित करना आवश्यक है | जल स्त्रोत का मत्स्य आखेट के ऐसे उपकरणों, जो अन्य जलों में प्रयोग हुए हों के रूप में प्रयोग मृत मछली का आखेट के समय मछली आकर्षण के लिए प्रयोग तथा किस्तीयों का एक झील/जलाशय से दूसरे में स्थानान्तरण पर बीमारी फैलने का भी रहता है | पानी स्त्रोत पर मछली अथवा पैरावैगनी किरणों के प्रयोग से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है | कपड़े धोने के लिए जल स्त्रोत का प्रयोग, कार्यशालाओं, घरों अथवा खेतों के बीच से बहने वाले जल जिनमें रासायनों का प्रयोग किया हो, के कारण पानी की गुणवत्ता कम हो जाती है | एल्यूमिनियम तथा लोहे की अत्याधिक मात्रा, अमलिया पानी तथा आक्सीजन व तापमान में यकायक फेरबदल से मछली की बीमारी रोधक क्षमता में कमी आ जाती है |


फार्म पर नया पशुधन लाने से पूर्व पहले के समय के पशुधन का विक्रय अथवा वहां से परिवहन आवश्यक है | इससे एक वर्ष के मछली संक्रमण को अगले वर्ष में प्रभाव डालने से रोका जा सकता है | खाली तालाबों की सफाई, कीटाणूनाशक ने पशुधन को लाने से पूर्व करना आवश्यक है | फार्म के विभिन्न कक्षों की दिनचर्या अलग-अलग रखने से बीमारी को फैलने से रोका जा सकता है | कम घातक बीमारी होने पर की कक्षों के मत्स्य धन को बीमारी से बचाया जा सकता है |


अनावश्यक छेड़छाड़:-


मछली को बार-बार छेड़ने से उसे हानि पहुंच सकती है | सघन मत्स्य पालन में अपर्याप्त आहार देने पर इसके गम्भीर परिणाम हो सकते हैं | यदि संभव हो तो मछली एक स्थान से दूसरे पर जल में ही पम्प के माध्यम से स्थानांतरित की जाए|


रोगों का फैलना :-


चूहों तथा पक्षियों जैसे शरारती जीव, सूक्ष्म जीवियों को फैलने में काफी भूमिका निभाते हैं | पक्षी आँख तथा पेट के विभिन्न परजीवियों को ही नहीं रखते परन्तु मछली के लिए हानिकारक सूक्ष्म जीव भी इनमें काफी समय तक जीवित रह सकते हैं | फार्म पर आने वाले आगंतुक भी सूक्ष्म जीवों को एक स्थान से दूसरे स्थान में परिवहन की भूमिका निभाते हैं | जंगली मछली पर कार्य करने अथवा अन्य फार्मों पर उपरान्त समस्त उपकरणों का रोगाणूनाशन, कपड़ों का बदलाव तथा हाथों को धोना आवश्यक है | फार्म प्रबंधक का यह दायित्व है कि वह आगंतुकों को समस्त सफाई नियमावली से परिचित करवाएं | इसके लिए उसे आगंतुकों की पूर्वत: सूचना आवश्यक है| फ़ार्म के मुख्य प्रवेश द्वार पर सफाई नियमावली का लिखित उल्लेख किया जाना चाहिए |






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