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Framework of Agricultural Activities for 52 Weeks

जनवरी फ़रवरी मार्च अप्रैल मई जून
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जनवरी (1 से 5 सप्ताह)


  1. मुख्यत: कुल्लू घाटी में यदि सर्दियों की बारिश आने में बहुत देरी हो जाए तो गेहूं किस्म एस.एच – 295 की बिजाई जनवरी के पहले पखवाड़े तक करें | ऐसी स्तिथि में बारानी खेती के लिए दी गई नाइट्रोजन उर्वरकों की मात्रा को 25 प्रतिशत अधिक दें | मसर (बिपाशा), सरसों (बी.एस.एच-1) या राया (वरुणा) को क्रमशः इस परिस्थिति में लगाए | 

  2. देरी से बोई गेहूं में मूसल जड़ें निकलने की अवस्था में यूरिया या कैन की दूसरी मात्रा का उपयोग करें | खरपतवारों की 2-3 पत्ती की अवस्था में खरपतवारनाशक रसायनों क प्रयोग करें |

  3. वर्षा व मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूं फसल की क्रांतिक अवस्थाओं में तथा मूसल/शीर्षजड़ अवस्था (बिजाई के 21-25 दिन), कसे फूटने/दोजिया निकलने की अवस्था (बिजाई के 45-60 दिन) गांठ बनने की अवस्था (बिजाई के 60-70 दिन), फूल आने की अवस्था (बिजाई के 90-95 दिन), दूध भरने की अवस्था (बिजाई के 100-105 दिन) व दाना पकने की अवस्था (बिजाई के 120-125 दिन) पर सिंचाई करें | 

  4. प्राय: रेतीली भूमियों या उन जमीनों में जहां से ऊपर की मिट्टी हटा दी गई हो या जो क्षारीय मिट्टी हो जिसमें कैल्शियम कार्बोनेट अथवा कार्बन की अधिकता हो, जस्त की कमी होती है | अत: गेहूं फसल में जस्त की कमी के लक्षण (बालियां फूटने की अवस्था में पुरानी पत्तियों के पत्रदल के मध्य पीले धब्बों के दिखाई पड़ना, बाद की अवस्था में अनियमित रूप से बढ़कर हलके भूरे रंग में बदलकर धब्बों के स्थान का उत्तक भर जाना एवं प्रभावित पत्तियां बीच से नीचे की ओर झुकी हुई पाये जाने तथा नई पत्तियां भी प्रभावित होने की स्थिति) दिखाई पड़ने पर 400 ग्राम जिंक सल्फेट और 200 ग्राम बुझे हुए चुने को 64-68 लीटर पानी में घोलकर एक बीघे में छिड़काव करें |

  5. सरसों व राया में यूरिया कैन (5 कि.ग्रा. या 10 कि.ग्रा. प्रति बीघा) की शेष मात्रा फूल आने से पहले दें | गोभी सरसों में यूरिया (5 कि.ग्रा.बीघा) या कैन (10 कि.ग्रा./बीघा) की तीसरी मात्रा दें | 

  6. सरसों वर्ग की तिलहनी फसलों जैसे भूरी सरसों, राया, गोभी सरसों, इत्यादि में तेले (एफिड) का प्रकोप हो सकता है | यह कीट पौधों की टहनियों, फूलों और फलियों के साथ अत्यधिक संख्या में जूं की तरह चिपके रहते है | और रस चूस कर पौधों को क्षति पहुंचाते है | इस कीट का अधिक प्रकोप होने पर (मध्य की ऊपरी 10 सेंटीमीटर (सैं.मी.) शाखा पर कम से कम 50 तेले फसल में 60 मिलीलीटर (मि.ली.) साइपरमैथ्रिन 10 ई.सी. या मिथाईल डेमिटान 25 ई.सी. या डाईमिथोएट 25 ई.सी. का 60 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति बीघा (800 वर्गमीटर) छिड़काव करें |

  7. गोभी वर्षीय सब्जियों में तेले का प्रकोप होने पर मैथालियन 50 ई.सी. (60 मि.ली. प्रति 60 लीटर (ली.) पानी प्रति बीघा) का 15 दिन के अन्तराल पर छिड़काव करें | 

सब्जियां

निचले पर्वतीय क्षेत्र

  1. प्रदेश के निचले पर्वतीय क्षेत्रों में प्याज के तैयार पौधे की रोपाई 15 सैं.मी. पंक्तियों में तथा 7-10 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें | खेत तैयार करते समय 20 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा रोपाई के समय 20 कि.ग्रा. कैन या 10 कि.ग्रा. यूरिया, 40 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें |



  2. पोलीथीन के लिफाफों में कददू वर्गीय सब्जियों (खीरा, करेला, चप्पन कददू, घीया, पण्डोल इत्यादि) की पनीरी दें | पनीरी उगाने के लिए प्रत्येक लिफाफे में एक भाग मिट्टी तथा एक भाग गोबर की गली-सड़ी खाद का मिश्रण भर कर प्रति लिफाफा 1-2 बीज बोएं | लिफाफों में हल्की सिंचाई करने के उपरान्त इन्हें कहीं गर्म स्थान (बरामदे पोलीहाऊस इत्यादि) में रखें | जल्दी बीज अंकुरण के लिए बिजाई से पहले बीजों को 24 घन्टे तक पानी में भिगोएं |

  3. इसी समय आलू की सुधरी किस्मों जैसे कुफरी गिरिराज, कुफरी ज्योति, कुफरी चन्द्रमुखी, की बिजाई की जा सकती है | बिजाई के लिए स्वस्थ, रोग रहित, साबुत या कटे हुए कन्द (वजन लगभग 30 ग्राम) जिनमें कम से कम 2 आंखें हो, का प्रयोग करें | बीजाई से पहले कन्दों को इण्डोफिल एम 45 (25 ग्राम प्रति 10 लीटर पानी) के घोल में आधे घन्टे तक भिगोने के उपरान्त छाया में सुखाकर बिजाई करें | आलू की बीजाई अच्छी तरह से तैयार खेत में 15-20 सैं.मी. आलू से आलू तथा 45-60 सैं.मी. पंक्तियों से पंक्तियों की दूरी पर नालियां बनाकर की जा सकती है | अच्छी तरह से तैयार खेतों में उचित दूरी पर नालियां बनाएं तथा उनमें 10 कि.ग्रा. यूरिया या 20 कि.ग्रा. कैन 40 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश खादों क मिश्रण प्रति बीघा खेतों में डालें | गोबर की अच्छी गली-सड़ी खाद लगभग 20 क्विंटल प्रति बीघा नालियों में डालकर इसके ऊपर बीज आलू लगाएं | इसके उपरान्त नालियों को आधा या पूरा मिट्टी से ढक दें |

  4. खेतों में लगी सभी प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बन्दगोभी, गांठगोभी, चाइनीज बन्दगोभी, पालक, मटर, लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें तथा नत्रजन (3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन) प्रति बीघा खेतों में डालें | आवश्यकतानुसार 8-10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें | 

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:

  1. इन क्षेत्रों में आलू की बीजाई के लिए सुधरी किस्मों जैसे कुफरी ज्योति, कुफरी चन्द्रमुखी, कुफरी गिरीराज इत्यादि का चयन करें | बीजाई के लिए उपरोक्त विधि का प्रयोग करें|

  2. प्याज की तैयार पौधों की रोपाई भी 15-20 सैं.मी. पंक्तियों में तथा 10-20 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर की जा सकती है |

  3. सभी प्रकार की सब्जियों जैसे फूलगोभी, बन्दगोभी, चाइनीज, बन्दगोभी, पालक, मटर, व लहसुन इत्यादि में निराई-गुड़ाई करें तथा नत्रजन (3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन बीघा) खेतों में डालें | आवयश्कतानुसार 8-10 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें |

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Visitor No.: 06339581   Last Updated: 13 Jan 2016