घरहमसे संपर्क करेंनौकरी प्रोफाइलनिविदा सूचनाबजटसूचना का अधिकार अधिनियमअधिनियम और नियमविक्रेताG2G Loginमुख्य पृष्ठ     View in English    
  कृषि के ऑनलाइन पोर्टल में आपका स्वागत है    
मुख्य मेन्यू
हमारे बारे में
उपलब्धियां
कार्य योजना
महत्वपूर्ण क्षेत्र
कार्य
लक्ष्य
गैलरी
संगठनात्मक संरचना
कृषि जलवायु क्षेत्र
शिकायत निवारण सेल
अभ्यास का पैकेज
52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा
भूमि उपयोग के तरीके
एन.बी.एम.एम.पी.
अन्य उपयोगी लिंक
कृषि मोबाइल पोर्टल
52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा

जनवरी फ़रवरी मार्च अप्रैल मई जून
जुलाई अगस्त सितम्बर अक्टूबर नवंबर दिसम्बर

फ़रवरी (6 से 9 सप्ताह)


  1. क्रांतिक अवस्थाओं में मौसम को ध्यान में रखते हुए गेहूं में से सिंचाई करें ताकि नमी के अभाव का असर फसल पर ना पड़ें | अधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में गेहूं में जल निकास का उचित प्रबन्ध करें ताकि खेतों में पानी खड़ा ना हो पायें |

  2. गन्ने की अच्छी मूडी फसल लेने के लिए, फ़रवरी में काटे | जहां सिंचाई की सुविधा हो बीज वाली फसल की तरह सिंचाईयां करें | अच्छे अंकुरण के लिए कटाई, जमीन की सतह के साथ करें | सी.ओ. -1148, सी.ओ.एस. -767 एवं सी.ओ.जे. -64 क्रमश मूडी फसल लेने के लिए उपयुक्त किस्में है | 

  3. निचले तथा मध्यवर्ती पर्वतीय क्षेत्रों में सूरजमुखी (ई.सी 68415) की बीजाई दूसरे पखवाड़े में करें | 8-10 कि.ग्रा. बीज / बीघा पर्याप्त होता है | 60 सैं.मी. अन्तर की कतारों में तथा 25-30 सैं.मी. पौधे से पौधे के अन्तर में बिजना चाहिए | बीज को 3-4 सैं.मी. गहरा बीजें | यदि भूमि में नमी की कमी हो तो बीज को बीजाई से पहले 6-8 घन्टे तक पानी में भिगोना चाहिए | बिजाई के समय 6.9 कि.ग्रा. यूरिया या 2.8 कि.ग्रा. कैन व 30 कि.ग्रा. एस.एस.पी. प्रति बीघा डालें | खरपतवार नियन्त्रण के लिए बीजाई से पहले बासालिन (फलूक्लोरिन) 45 ई.सी. 180 ग्राम / बीघा 64-80 लीटर पानी में छिड़काव करें व जमीन की ऊपरी 3-4 सैं.मी. सतह में मिलाएं | छिड़काव शाम के समय करें | 

  4. सरसों व गोभी वर्गीय फसलों में तेले का प्रकोप होने पर जनवरी माह के अन्तर्गत वर्णन किये गये कीट नाशकों का प्रयोग करें | गोभी में विभिन्न सुंडियां (कैटर पिल्लर, सेमीलूपर, डायमंड बेंक मोथ इत्यादि) जो पत्ते खाकर हानि पहुंचाती है, के नियन्त्रण के लिए 60 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति बीघा छिड़काव करें |

  5. चने की फसल में फली छेदक सुंडियों का प्रकोप होने पर 120 ग्राम कार्बरिल 50 डब्ल्यू.पी या 120 मि.ली. एण्डोसल्फान 35 ई.सी. को 60 लीटर पानी में घोल कर प्रति बीघा छिड़काव करें | 

  6. गेहूं में पीला रतुआ, भूरा रतुआ, काला रतुआ, बिमारियों क पहला लक्षण प्रकट होते ही डाईथेन एम-45 (2 ग्रा. प्रति ली.पानी के हिसाब से) का 15 दिन के अन्तर पर छिड़काव करें |

  7. सिटेरिया की सिटेरिया-92, नन्दी, व पी.एस.एस-1 किस्मों की रोपाई घासनियों में 30 x 30 सैं.मी. व खेतों में 50 x 50 सैं.मी. के अन्तर पर करें |

सब्जियां

निचले पर्वतीय क्षेत्र

  1. फ्रासबीन की की सुधरी व बोनी किस्मों (कन्टेडर, प्रीमियर, पूसा पार्वती, अर्का कोमल ) की बीजाई पंक्तियों में 30-45 सैं.मी. तथा पौधों में 10-15 सैं.मी. की दूरी पर करें | खेत तैयार करते समय 16 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 50 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश खादों क मिश्रण प्रति बीघा पंक्तियों में डालकर बिजाई करें |



  2. भिण्डी की सुधरी किस्मों पी. 8, अर्का अनामिका, परवनी क्रान्ति, वर्षा उपहार एवं संकर किस्मों की बीजाई पंक्तियों में 30-45 सैं.मी. तथा पौधों में 7-10 सैं.मी. की दूरी पर करें | अच्छी गली-सड़ी गोबर की खाद लगभग 8 क्विंटल प्रति बीघा खेत तैयार करते समय डालें | इसके अतिरिक्त बीजाई के समय 12 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा खादों क मिश्रण खेतों में डालें | शेष कैन की 8 कि.ग्रा. मात्रा डो बराबर हिस्सों में एक-एक महीने के अन्तराल पर गुड़ाई के समय फसल में डालें |

  3. फ्रासबीन व भिण्डी आदि सब्जियों की बिजाई करने से पहले बीज का उपचार बेवस्टीन 50 डब्ल्यू.पी. (2 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज) फफूंदनाशक से अवश्य करें |

  4. इसी समय टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च तथा लाल मिर्च की पनीरी उगाई जा सकती है | जीवाणु मुरझान रोग प्रभावित क्षेत्रों में जीवाणु मुरझान रोग प्रतिरोधी किस्मों जैसे टमाटर (पालम पिंक, पालम प्राइड, रुपाली (संकर), अवतार (संकर), मीनाक्षी (संकर), नवीन (संकर) बैंगन (पी.पी.सी., अर्का निधि, अर्का केशव, अर्का नीलकण्ठ, पंजाब बरसाती), शिमला मिर्च (कैलिफोर्निया वंडर, येलो वंडर, भारत (संकर) तथा लाल मिर्च (सूरजमुखी), सी.एच. (संकर), सी.एच 3 (संकर) का ही चयन करें | इन सब्जियों की स्वस्थ पौधे उत्पादन हेतु 3 मीटर लम्बी, एक मीटर चौड़ी तथा 10-15 सैं.मी. ऊंची क्यारियों में 20-25 कि.ग्रा. खूब गली-सड़ी गोबर की खाद, 200 ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट, 15-20 ग्रा. फफूंदनाशी इण्डोफिल एम 45 तथा 20-25 ग्रा. कीटनाशी थीमेट या फोलीडाल धूल मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाने के उपरान्त 5 सैं.मी. पंक्तियों की दूरी पर बीज की पतली बिजाई करें | बीजाई के उपरान्त क्यारियों को सूखी घास या पोलीथीन की सफेद चादर से ढक दें तथा बीज अंकुरण पर इन्हें हटा दें |

  5. इस महीने किसान मूली की सुधरी प्रजाति ‘पूसा हिमानी’ की बीजाई कतारों में 25-30 सैं.मी. की दूरी पर कर सकते है | खेत तैयार करते समय 8 क्विंटल प्रति बीघा गोबर की गली-सड़ी खाद क प्रयोग करें तथा बीजाई के समय कतारों में 16 कि.ग्रा. कैन, 24 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 5 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा की दर से खेतों में डालें | शेष कैन की 16 कि.ग्रा. मात्रा दो बराबर हिस्सों में एक निराई-गुड़ाई के समय तथा दूसरी इसके एक महीने बाद फसल में डालें | 

  6. प्याज, लहसुन, बन्दगोभी तथा फूलगोभी में निराई-गुड़ाई करें तथा नत्रजन की मात्रा (3-4 कि.ग्रा. यूरिया प्रति बीघा) सब्जियों में डालें |

  7. पालक की सुधरी किस्मों (पूसा हरित, आल ग्रीन, पूसा भारती, बैनर्जीज जाइंट) की बीजाई पंक्तियों में 25-30 सैं.मी. की दूरी पर की जा सकती है खेत तैयार करते समय 8 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 12 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 4.0 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें |

  8. कद्दू वर्गीय सब्जियों जैसे खीरा (पाईनसैट, लौंग ग्रीन, पूसा संयोग (संकर) मालिनि (संकर), चप्पन कद्दू (आस्ट्रेलियन ग्रीन, पूसा अलंकार (संकर), घीया (पी.एस.पी.एल., पी.एस.पी.आर., पूसा मंजरी (संकर), पूसा मेघदूत (संकर), पंजाब कोमल), करेला (सोलन हरा, सोलन सफेद), पण्डोल, तोरी (पूसा चिकनी) इत्यादि की सीधी बीजाई समतल खेतों, नालियों, मेढ़ों या थाले बनाकर की जा सकती है |

  9. मटर में चूर्णसिता रोग (पाउडरी मिल्डयू) के लक्षण देखते ही कैराथेन (5 मि.ली.) या वैटेबल सल्फर (20 ग्रा.) या बैवस्टीन ( 5 कि.ग्रा.) या बैलिटान (5 ग्रा.) को 10 लीटर पानी में घोल कर छिड़काव करें | मटर में लीफ माईनर (पर्णखनिक) कीट का अधिक प्रकोप होने पर 50 मि.ली. लैम्बडा-साईहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत या 45 मि.ली. साईपरमैथ्रिन 10 ई.सी. या 60 मि.ली. मिथाइल डेमिटान 25 ई.सी. को 60 लीटर पानी में घोल कर प्रति बीघा क्षेत्र में छिड़काव करें | 

  10. आलू में बीज अंकुरण से पहले खरपतवार नियन्त्रण के लिए एट्राजीन 50 डब्ल्यू.पी. (80 ग्राम) या आइसोप्रोटूरान 75 डब्ल्यू.पी. (120 ग्राम) प्रति 60 लीटर पानी में घोलकर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करें |

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:

  1. आलू से बीज अंकुरण से पहले खरपतवार नियन्त्रण के लिए एट्राजीन 50 डब्ल्यू.पी. 80 ग्रा. या आइसोप्रोटूरान 75 डब्ल्यू .पी. 120 ग्रा. प्रति 60 लीटर पानी में घोल कर प्रति बीघा की दर से छिड़काव करें|

  2. मूली की सुधरी प्रजाती ‘पूसा हिमानी’ की बिजाई पंक्तियों में 25-30 सैं.मी. की दूरी पर करें| बीजाई के समय 8.0 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद के अतिरिक्त 16 कि.ग्रा. कैन, 24 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 5 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश खादों क मिश्रण प्रति बीघा खेतों में डालें|

  3. फूलगोभी तथा बन्दगोभी में फूल बनने के समय इन सब्जियों में नत्रजन की तीसरी मात्रा (3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन प्रति बीघा) डालें| 

  4. ग्रीष्म कालीन सब्जियों की काश्त के लिए टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च, लाल मिर्च, इत्यादि की सुधरी एवं रोग रहित किस्मों का चयन करें तथा स्वस्थ पौधे उत्पादन हेतू बीज की क्यारियों में बीजाई करें|

मुख्य पृष्ठ|उपकरणों का विवरण|दिशा निर्देश और प्रकाशन|डाउनलोड और प्रपत्र|कार्यक्रम और योजनाएं|घोषणाएँ|नीतियाँ|प्रशिक्षण और सेवाएँ|रोग
Visitor No.: 06339474   Last Updated: 13 Jan 2016