घरहमसे संपर्क करेंनौकरी प्रोफाइलनिविदा सूचनाबजटसूचना का अधिकार अधिनियमअधिनियम और नियमविक्रेताG2G Loginमुख्य पृष्ठ     View in English    
  कृषि के ऑनलाइन पोर्टल में आपका स्वागत है    
मुख्य मेन्यू
हमारे बारे में
उपलब्धियां
कार्य योजना
महत्वपूर्ण क्षेत्र
कार्य
लक्ष्य
गैलरी
संगठनात्मक संरचना
कृषि जलवायु क्षेत्र
शिकायत निवारण सेल
अभ्यास का पैकेज
52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा
भूमि उपयोग के तरीके
एन.बी.एम.एम.पी.
अन्य उपयोगी लिंक
कृषि मोबाइल पोर्टल
52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा

जनवरी फ़रवरी मार्च अप्रैल मई जून
जुलाई अगस्त सितम्बर अक्टूबर नवंबर दिसम्बर

अप्रैल (15 से 18 सप्ताह)


  1. पककर तैयार हुई गेहुं फसल एवं अन्य रबी फसलों की कटाई करें| विलम्ब से बोई गई गेहुं फसल की अन्तिम क्रान्तिक अवस्था में हल्की सिंचाई करें तथा किस्म की शुद्धता के लिए विजातीय पौधों के छांट दें|

  2. सरसों आदि तिलहनी फसलों में तेले के नियन्त्रण के लिए एक या दो बार कीटनाशकों का छिड़काव करना पड़ सकता है| इसके लिए पहले वर्णित कीटनाशकों का ही प्रयोग करें|

  3. चने की फसल में फली छेदक सुंडी के प्रकोप पर ध्यान केन्द्रित करें तथा आवश्यकता होने पर पूर्वलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का छिड़काव करें| 

  4. किन्नौर के ऊपरी क्षेत्रों के पखवाड़े में गेहुं (अराधना एच.पी.डब्ल्यू-42) की बीजाई करें| बीज 25 सैं.मी. के अन्तर की कतारों में बीजें| 9.6 कि.ग्रा. बीज/ बीघा पर्याप्त होता है| ढलानदार खेतों में, कतारों को ढलान की विपरित दिशा में बनाये ताकि सिंचाई द्वारा भूमि का कटाव ना हो| 9.6 कि.ग्रा. एस.एच.पी. व 4 कि.ग्रा. एम.ओ पी./बीघा बीजाई के समय डालें| कैन (9.6 कि.ग्रा./बीघा) या यूरिया (5.2 कि.ग्रा./बीघा) की दूसरी मात्रा पहली सिंचाई के बाद शीर्षजड़ अवस्था (21-25 दिन के बाद) में छिटकें|

  5. ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में यदि सूरजमुखी की बीजाई मार्च में नही की हो, तो मास के आरम्भ में करें| 

  6. जिन क्षेत्रों में गन्ने की बीजाई की जाती है वहां दीमक व तना छेदक कीटों की रोकथाम के लिए 60 मि.ली. क्लोरपाईरिफास 20 ई.सी. को 2 कि.ग्रा. रेत में मिलाकर परतों बीघा की दर से खेत में मिलाएं|

चारे की फसलें


  1. चारे के लिए अगेती मक्की व ज्वार की बुआई प्रथम पखवाड़े में करें|

  2. चारे की अधिक उपज के लिए मक्की+सोयाबीन, मक्की+रोगी, व मक्की+ फील्डवीन की मिश्रित खेती लाभदायक रहती है| मक्की+रोगी के लिए बीज की मात्रा 3.2+1.2 कि.ग्रा./बीघा रखें| बीजाई के समय 6.9 कि.ग्रा. युरिया या 12.8 कि.ग्रा. कैन व 30 कि.ग्रा. एस.एस.पी. डालें| बीजाई शुरू अप्रैल में करें| 

  3. नेपियर बाजरा हाइब्रिड में 15 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें

  4. गिन्नी ग्रास की पी.जी.जी.-9 किस्म की नर्सरी लगाएं| बीज 20 सैं.मी. के अन्तर की कतारों में 2 सैं.मी. गहरा लगाएं व बारिक मिट्टी से ढक दें| बीजाई के तुरन्त बाद सिंचाई करें| उसके बाद 7 दिन के अन्तराल पर सिंचाई करें|

  5. शुष्क शितोष्ण क्षेत्रों में रेड क्लोवर की बीजाई बगीचों से बर्फ पिघलने के उपरान्त 30 सैं.मी. के अन्तर की कतारों में करें| बीज की मात्रा में क्रमशः 720-960 व 240-400 ग्रा./बीघा पर्याप्त होती है| इसी समय रिजका, टाल फैस्क्यू, आरचर्ड ग्रास, कैनरी ग्रास, टिमोथी की बीजाई कर सकते है| 

  6. टाल फैस्क्यू, आरचर्ड ग्रास, कैनरी ग्रास, टिमोथी में बीजाई के एक महीने बाद यूरिया (3.4 कि.ग्रा./बीघा) या कैन (6.4 कि.ग्रा./बीघा) सिंचाई के उपरान्त डालें|

सब्जियां

निचले पर्वतीय क्षेत्र

  1. भिण्डी की सुधरी किस्मों पी. 8, अर्का अनामिका, परवनी क्रान्ति, वर्षा उपहार, पंचाली (संकर) वर्षा (संकर) की बीजाई पंक्तियों में 30-45 सैं‌.मी. तथा पौधों में 7-10 सैं‌.मी. की दूरी पर की जा सकती है| खेत तैयार करते समय अच्छी गली-सड़ी गोबर की खाद 8 क्विंटल प्रति बीघा खेतों में डालें| इसके अतिरिक्त बीजाई के समय 12 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा खादों का मिश्रण खेतों में डालें|



  2. विभिन्न बिमारियों की रोकथाम हेतु इस महीने में लगाई जाने वाली सब्जियों जैसे भिण्डी व फ्रांसबीन आदि के बीज का पूर्ववर्णित तरीके से उपचार करें|

  3. इस महीने बैंगन, शिमला मिर्च तथा लाल मिर्च की तैयार पौधे की रोपाई क्रमशः 60 x 45 सैं‌.मी. 60 x 45 सैं‌.मी. तथा 45 x 45 सैं‌.मी. अन्तर पर की जा सकती है| खेत तैयार करते समय 20 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा रोपाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 38 कि.ग्रा. सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| 

  4. भूमिगत कीटों (कटुआ, सफेद सुंडी, दीमक आदि) से ग्रस्त खेतों में बैंगन, टमाटर, शिमला मिर्च व अन्य सब्जियों की पौधे की रोपाई करने से पहले क्लोरपाईरिफास 20 ई.सी. नामक कीटनाशक पहले बताए गये तरीके से खेत में मिलाएं|

  5. कद्दू वर्गीय सब्जियों जैसे खीरा (पाईनसैट, लोंग ग्रीन, पूसा संयोग (संकर), मालिनि (संकर), करेला (सोलन हरा, सोलन सफेद, संकर किस्में), पण्डोल तथा घीया (पी.एस.पी एल. पी.एस.पी.आर) पूसा मंजरी (संकर), पूसा मेघदूत (संकर) इत्यादि की सीधी बीजाई समतल खेतों, नालियों या थाले बनाकर की जा सकती है| ध्यान रखे कि इन सब्जियों में अधिक नत्रजन खाद का प्रयोग न हो|

  6. प्याज में डाऊनी मिल्डयूनामक रोग के प्रति सावधान रहे तथा रोग आते ही रिडोमिल एम. जैड (25 कि.ग्रा./10 लीटर पानी) का छिड़काव करें|

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:

  1. भिण्डी की सुधरी प्रजातियों (परवनी क्रान्ति, पी- 8, अर्का अनामिका, वर्षा उपहार) एवं फ्रांसबीन की झाड़ीदार किस्मों (कन्टेडर, प्रीमियर, पूसा पार्वती, अर्का कोमल) की बीजाई 30-45 सैं‌.मी. पंक्तियों में तथा 7-10 सैं‌.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें|

  2. इन क्षेत्रों में इसी समय टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च तथा लाल मिर्च की रोपाई की जा सकती है| खेत तैयार करते समय इन सब्जियों में 20 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा रोपाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 38 कि.ग्रा, सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में मिलाएं| खरपतवार नियन्त्रण के लिए रोपाई से दो दिन पूर्व खरपतवारनाशी रसायनों जैसे लासो (एलाक्लोर) 320 मि.ली. या स्टाम्प (पैणिडमिथेलिन) 320 मि.ली. का 60 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव किया जा सकता है|

  3. इसी समय किसान टमाटर, बैंगन, शिमला मिर्च व लाल मिर्च की सुधरी किस्मों की पनीरी भी उगा सकते है|

  4. कद्दू वर्गीय सब्जियों की सुधरी किस्मों जैसे खीरा (पाइनसैट, लौंग, ग्रीन, पूसा संयोग (संकर), करेला, (सोलन हरा, सोलन सफेद), घीया (पी.एस.पी.एल. पी.एस.पी.आर, पूसा मंजरी, पुनजब कोमल) की सीधी बीजाई भी खेतों में की जा सकती है|

ऊंचे पर्वतीय क्षेत्र :

  1. अप्रैल महीने के प्रथम पखवाड़े में खीरे की सुधरी किस्मों पाईनसैट, लोंग ग्रीन तथा संकर किस्मों की बीजाई लिफाफों में करें तथा इन्हें किसी गर्म जगह पर रख दें|

  2. जड़दार सब्जियों जैसे मूली (पूसा हिमानी, आलू सीजनस), शलजम (पी.टी.डब्ल्यू.गी), गाजर (नान्तीज, पूसा यमदागिनी) तथा पालक (पूसा हरित, पूसा भारती) की बीजाई पंक्तियों में 25-30 सैं‌.मी. की दूरी पर करें|

  3. इसी समय फूलगोभी (के. 1 पी.एस.वी. 16), बन्दगोभी (गोल्डन एकड़, प्राईड आफ इण्डिया, वरुण (संकर), बहार (संकर) ब्राकली (पालम समृद्धि) तथा प्याज (नासिक रैड, पटना रैड, एग्रीफाऊणड डार्क रैड तथा एग्रीफाऊणड लाईट रैड) की सवस्थ पौध उगाने के लिए क्यारियों में बीजाई करें|

  4. मटर की जल्दी तैयार होने वाली किस्मों (अरकल, मटर अगेता) तथा मुख्य मौसम की किस्मों (आज़ाद पी. 1, लिंकन, पालम प्रिया) इत्यादि की बीजाई पंक्तियों में 30-45 सैं‌.मी तथा 10 सैं‌.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर की जा सकती है| खेत तैयार करते समय 16 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 30 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें|

  5. कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में टमाटर तथा शिमला मिर्च की रोपाई योग्य स्वस्थ पौध उपलब्ध हो तो इन सब्जियों की रोपाई भी तैयार खेतों में की जा सकती है|

  6. इस समय ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में फ़्रांसबीन (कन्टेडर, प्रीमीयर, अर्का कोमल), भिण्डी (पी. 8, अर्का अनामिका) तथा लहसुन (जी.एच.सी., एग्रीफाऊणड पार्वती) इत्यादि की सीधी बीजाई भी खेतों में की जा सकती है|

  7. आलू की सुधरी किस्मों जैसे कुफरी गिरिराज, कुफरी ज्योति तथा कुफरी चन्द्रमुखी इत्यादि की बीजाई करें|

मुख्य पृष्ठ|उपकरणों का विवरण|दिशा निर्देश और प्रकाशन|डाउनलोड और प्रपत्र|कार्यक्रम और योजनाएं|घोषणाएँ|नीतियाँ|प्रशिक्षण और सेवाएँ|रोग
Visitor No.: 06339480   Last Updated: 13 Jan 2016