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52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा

सितम्बर (36 से 39 सप्ताह)


  1. मक्की, माश, मूंग, सूरजमुखी इत्यादि की फसल पकते ही कटाई कर लें| अधिक उपज देने वाली मक्की की किस्में जल्दी ही पककर तैयार हो जाती हैं जबकि पौधा अभी तक हरा ही होता है| भुट्टों के बहार का पर्णच्छद भूरा हो जाना फसल पकने का संकेत देता है| माश व मूंग के पौधे जब आधे पीले हो जाएं व फलियां काली पड़ जाएं तो फसल की कटाई करें| 

  2. मक्की की कटाई के समय पौधों को जमीन के साथ काटें तथा अवशेषों को इक्ट्ठा करके नष्ट कर दें| इससे तना बेधक कीट की संख्या कम होने में सहायता मिलती है| 

  3. खरीफ मौसम की विभिन्न दलहनी, तिलहनी, फसलों के अवशेषों व सब्जियों की बेलों इत्यादि को इक्ट्ठा करके जला दें तथा इसे खेतों के आसपास न रखें| खेतों में घास-फूस को भी निकाल कर जला दें या जानवरों को खिला दें| (ऐसा करने से विभिन्न कीटों व बिमारियों के नियन्त्रण में सहयता मिलती है)| 

  4. धान की फसल में यदि आभासी कांगियारी (प्रत्येक दाना हरा, मखमली फफूंद के गोले में बदल जाता है) नामक रोग के लक्षण नजर आएं तो रोग-ग्रस्त बालियों को इक्ट्ठा करके जला दें| 

  5. अरहर की फसल में धारीदार भृंग के प्रकोप का विशेष ध्यान रखें| यह कीट फूलों को खाकर नष्ट कर देता है तथा उत्पादन में भारी कमी कर सकता है| इसके नियन्त्रण के लिए 120 मि.ली. इण्डोसल्फान 35 ई.सी. या 60 मि.ली. मिथाइल पैराथियान 50 ई.सी. को 60 लीटर पानी में घोल बना कर प्रति बीघा क्षेत्र में छिड़काव करें| 

  6. तोरिया (डी.के.-1 व भवानि) की बीजाई 20 सितम्बर तक कर लें| देरी से बीजाई करने पर इसकी उपज में कमी आती है| बीज 2-3 सैं.मी. गहरा 30 सैं.मी. दूरी की कतारों में केरा या पोरा विधि से बीजें| 800-1200 ग्रा. बीज/बीघा पर्याप्त होता है| 

  7. ऊँचे पर्वतीय क्षेत्रों में रागी, राजमाश, केसर, चौलाई इत्यादि फसलों की सिंचाई पहले सप्ताह में करें| शीघ्र पकने वाली फसलों की कटाई करें| 

  8. कुठ बीजाई के तीन साल बाद पकती है| काटने से पहले खेत में अच्छी सिंचाई करें ताकि जड़ें आसानी से उखड़ सकें| जड़ों को महीने के अन्तिम सप्ताह में निकाले| 

  9. मध्य सितम्बर में बरसीम (मेसकावी, बी.एल.-1 बी.एल.-22) व शफतल (एस.एच-48) की बीजाई करें| बीजाई के समय 4.4 कि.ग्रा. यूरिया व 30 कि.ग्रा. एस.एस.पी. प्रति बीघा डालें| बीजाई के एक सप्ताह बाद सिंचाई करें| यदि बरसीम/शफतल की बीजाई खेत में पहली बार की जा रही हो तो बीज का राइजोबियम कल्चर से टीकाकरण भी करें| 

  10. बरसीम/शफतल+चाईनीज सरसों की मिश्रित खेती लाभदायक रहती है| 

  11. अंत दिसम्बर में जई+चाईनीज सरसों व बरसीम+जई की बीजाई करें जई की पालमपुर-1 व केन्ट किस्में बोए| 

  12. जुलाई में बोई सिटेरिया एवं गिन्नी ग्रास की पहली कटाई करें| प्रत्येक कटाई के बाद यूरिया या कैन (3.5 या 6.4 कि.ग्रा./बीघा) डालें| 

  13. बचे/फालतू चारे को साइलेज या सूखी घास में बदल लें ताकि कमी वाले समय में खिलाया जा सकें|

सब्जियां

निचले पर्वतीय क्षेत्र

  1. फूलगोभी की दरम्याना किस्मों (अगहेणी), पूसी, इम्प्रूवड जापानीज, पालम उपहार) सैं.मी की सवस्थ तैयार पौधे की रोपाई खेतों में 60 सैं.मी. कतारों तथा 45 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 20 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा रोपाई के समय 20 कि.ग्रा. कैन, 38 कि.ग्रा. सिंगल, सुपर फास्फेट तथा 10 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| शेष कैन की 20 कि.ग्रा. मात्रा दो बराबर हिस्सों में एक निराई-गुड़ाई के समय तथा दूसरा फूल बनने के समय फसल में डालें| खरपतवार नियन्त्रण के लिए लासो (एलाक्लोर) 240 मि.ली. प्रति 60 लीटर पानी प्रति बीघा, का रोपाई के दो दिन पूर्व तैयार खेतों में छिड़काव करें| 

  2. मटर की अगेती किस्मों(अरकल, मटर, अगेता, वी.एल-7) की बीजाई पंक्तियों में 30 सैं.मी. तथा 7-10 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 16 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 30 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डाला| खरपतवार नियन्त्रण के लिए लासो (एलाक्लोर) या स्टाम्प (पेणिडमिथेलीन) 240 मि.ली. प्रति 60 लीटर पानी के घोल की बिजाई के तुरन्त बाद खेतों में छिडकाव करें| 

  3. इस समय किसान फूलगोभी की पिछेती किस्मों (पी.एस.पी-1, पी.एस.बी. -16, कैन, पूसा,सुभ्रा, सीरेनो (संकर), स्वाति(संकर), श्वेता (संकर) , बंदगोभी (गोल्डन एकड़, प्राईड ऑफ इण्डिया, पूसा गुवता, बहार (संकर) वरुण(संकर), बजरंग(संकर),गांठगोभी (पालम टैन्डरनोव, व्हाईट बियाना, परपल बियाना) तथा ब्राकली (पालम समृद्धि, पालम विचित्र, पालम कंचन, ग्रीन हैड, इटेलियन ग्रीन) की पनीरी दें| पनीरी उगाने के लिए 3 मीटर लम्बी, एक मीटर चौड़ी तथा 10-15 सैं.मी. ऊंची क्यारी में 20-25 कि.ग्रा. गली-सड़ी गोबर की खाद, 200 ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट, 20-25 ग्रा. इण्डोफिल एम. 45 तथा 15-20 ग्रा. थीमेट या फोलीडल धूल मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाने के उपरान्त कतारों में 15-20 सैं.मी की दूरी पर बीज की पतली बिजाई करें| 

  4. चाइनीज बन्दगोभी की तैयार पौधे की रोपाई पंक्तियों में 45 सैं.मी. तथा पौधों में 30 सैं.मी. की दूरी पर की जा सकती है खेत तैयार करते समय 20 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा रोपाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 38 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| 

  5. गोभी आदि सब्जियों की पनीरी में कामकरोड़ रोग के बचाव हेतु पूर्णवर्णित उपाय करें| इन सब्जियों को रोपाई के बाद लाल चींटी व कटुआ कीट के प्रकोप से बचाने के लिए रोपाई के समय 160 मि.ली. क्लोरपाईरिफॉस 35 ई.सी. को 2 कि.ग्रा. रेत में मिला कर प्रति बीघा की दर से खेत में डालें| 

  6. जड़दार सब्जियों जैसे मूली (जापानीज व्हाईट, चाईनीज पिंक, मीनो अर्ली व्हाईट, आल सीजनस), गाजर (नान्तीज, चान्तनी, पूसा केसर), शलजम (पी.टी.डब्ल्यु.जी.) की सीधी बीजाई पंक्तियों में 20-30 सैं.मी .तथा पौधों में 5-7 सैं.मी. की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 8 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 5 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश खाद प्रति बीघा खेतों में डालें| कैन खाद की शेष 16 कि.ग्रा. मात्रा दो बराबर हिस्सों में एक मिट्टी चढ़ाते समय तथा दूसरी इसके एक महीने के उपरान्त फसल में डालें| 

  7. पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, पूसा हरित, आलू, ग्रीन, बैनर्जी जायंट, पूसा भारती) तथा मेथी (आई.सी. 74, कसूरी) की सीधी बीजाई समतल खेतों पर 20-25 सैं.मी. पंक्तियों तथा 5-7 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 8 क्विंटल गोबर गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 12 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 4 कि.ग्रा. म्यूरेट आफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| शेष कैन के 12 कि.ग्रा. मात्रा दो बराबर हिस्सों में बीजाई के एक-एक महीने के अन्तराल पर दो बार फसल में डालें| 

  8. इस महीने के दूसरे पखवाड़े में मक्की की कटाई के उपरान्त आलू की बीजाई की जा सकती है| बीजाई के लिए सवस्थ, साबुत या कटे हुए कन्द (वजन लगभग 30 ग्राम) जिनमें कम से कम 2 आंखे हो, का प्रयोग करें| अच्छे बीज अंकुरण के लिए आलू की आँखों से निकली छोटी कोंपलों को काट दें| आलू की बीजाई तैयार खेत में 45-60 सैं.मी. कतारों में तथा 15-20 सैं.मी. आलू से आलू की दूरी पर मेढ़ें बनाकर की जा सकती है| 

मध्य पर्वतीय क्षेत्र :

  1. मटर की अगेती किस्मों (अरकल, मटर अगेती, बी.एल.-7) की सीधी बीजाई 30x7-10 सैं.मी. की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 16 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 30 कि.ग्रा. सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में मिलाएं| बीजाई से पहले मटर के बीज का उपचार बैविस्टीन (2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा. बीज) की दर से करें| 

  2. फूलगोभी की पिछेती किस्मों (पी.एस.बी. 1, पूसा सूभ्रा), बन्दगोभी (गोल्डन एकड़, प्राईड ऑफ इण्डिया), गांठ गोभी (व्हाईट बियाना, पालम टैन्डरनोव), ब्राकली (पालम समृद्धि, पालम कंचन, पालम विचित्रा) तथा चाइनीज बन्दगोभी (पालमपुर ग्रीन) की पनीरी दें| पनीरी उगाने के लिए 3 मीटर लम्बी, एक मीटर चौड़ी, तथा 10-15 सैं.मी. ऊंची क्यारी में 20-25 कि.ग्रा. गली-सड़ी गोबर की खाद, 200 ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट, 20-25 ग्रा. इण्डोफिल एम. 45 तथा 15-20 ग्रा. थीमेट/फोलीडॉल धूल मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाने के उपरान्त 5 सैं.मी. की दूरी पर बीज की पतली बीजाई करें| 

  3. इसी समय जड़दार सब्जियों जैसे मूली (जापानीज व्हाईट, चाईनीज पिंक, मीनो अर्ली), शलजम (पी.टी.डब्ल्यू.जी.) गाजर (नान्तीज,चान्तनी, पूसा यम्दाग्नी) तथा पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक (पूसा हरित, आल ग्रीन, पूसा भारती, मेथी (आई.सी. 74 कसूरी) इत्यादि की बीजाई पंक्तियों में 20-25 सैं.मी. की दूरी पर करें| 

  4. सभी प्रकार की सब्जियों में निराई-गुड़ाई करें तथा नत्रजन की अनुमोदित मात्रा (3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन प्रति बीघा) फसल में डालें| 

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Visitor No.: 06339563   Last Updated: 13 Jan 2016