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52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा

नवम्बर (44 से 47 सप्ताह)


  1. खण्ड 1 व 2 में गेहूं की समय पर बुआई के लिए एच.पी.डब्ल्यु-89, एच.पी डब्ल्यु-147 व एच.एस-240 किस्मों लगाए| खण्ड 1 के निचले पर्वतीय क्षेत्र के लिए पी.बी.डब्ल्यु-396, पी.बी. डब्ल्यु-229 व पी.बी. डब्ल्यु-175 बारानी परिस्थितियों में तथा पी.बी. डब्ल्यु-343, डब्ल्यु-एच-542, यू.पी-2338, डब्ल्यु एच-595 व एच डी-2687 सिंचित परिस्थितियों के लिए अन्य उपयुक्त किस्में हैं| 

  2. गेहूं की बिजाई से पहले विभिन्न बिमारियों व दीमक के प्रयोग से प्रकोप से फसल को बचाने के लिए अन्य उपयुक्त किस्में है| 

  3. जौ में यदि सर्दी की बारिश न हो तो बिजाई के 3-4 सप्ताह बाद एक सिंचाई करें| सिंचित क्षेत्रों में जहां जौ की बिजाई न की हो प्रथम सप्ताह तक बीज की मात्रा 20-25 प्रतिशत बढ़ा कर बोएं| 

  4. अलसी में बिजाई के 3-4 सप्ताह के बाद यूरिया (45 कि.ग्रा./बीघा) या कैन (8कि.ग्रा./बीघा) की शेष मात्रा को डालें| बिजाई के 30-35 दिन के बाद आइसोप्रोटयुरान 75 प्रतिशत (135 ग्रा./बीघा) का छिड़काव करें| 

  5. मसर की बिजाई यदि नहीं की गई हो तो बीज की मात्रा 25 प्रतिशत बढ़ा कर मध्य नवम्बर तक करें| 

  6. मूंगफली की फसल के पत्ते जब पीले पडने आरम्भ हो जाएं और पुराने पत्ते गिरने लगे तो फसल काट लें| फसल के बण्डल 3-4 दिन धूप में सुखाकर फलियां अलग करें| फलियां एक सप्ताह तक धूप में सुखाएं तथा भंडारण करें| 

चारे की फसलें


  1. जई के लिए उत्तम समय है तथा यदि इसकी फसल पहले न लगाई गई हो तब अभी बोएं| 

  2. खण्ड 1 व 2 में लुर्सन (रिजका) की बीजाई करें| 

  3. खण्ड 4 में रेड क्लोवर, व्हाईट क्लोवर, लुर्सन, आरचर्ड ग्रास, कैनरी ग्रास व तियोथी की बीजाई करें| 

सब्जियां

निचले पर्वतीय क्षेत्र

  1. मटर की मुख्य मौसम की सुधरी किस्मों (लिंकन, आज़ाद पी. 1, पालमप्रिया, बी.एल. 3) आदि की बीजाई कतारों में 45-60 सैं.मी. तथा 10 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 16 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा बीजाई के समय 16 कि.ग्रा. कैन, 30 कि.ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट तथा 8 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| खरपतवार नियन्त्रण के लिए लाखों (एलाक्लेर) या स्टाम्प (पै‍णिडमिथेलिन) 240 मि.ली. प्रति 60 लीटर पानी के घोल का प्रति बीघा की दर से बीजाई के तुरन्त बाद छिड़काव करें| 

  2. विभिन्न रोगों (ब्लाईट, विल्ट इत्यादि) से बचाव के लिए मटर के बीज की बैविस्टीन (2.5 ग्रा. प्रति कि.ग्रा.) से उपचार करके बीजाई करें| 

  3. फूलगोभी, बन्दगोभी, गांठगोभी के स्वस्थ पौधे की रोपाई तैयार खेत में 45-60 सैं.मी. पंक्तियों तथा 30-45 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| 

  4. गोभी वर्गीय सब्जियों में रोपण के उपरान्त डाईथेन एम-45 (2.5 ग्रा. प्रति 10 लीटर पानी) और स्ट्रेटोसाइकलिन (1 ग्रा. प्रति 10 लीटर पानी) का सुरक्षात्मक छिड़काव करें| इन सब्जियों में कटुआ व लाल चींटी जैसे भूमि में पाये जाने वाले कीटों से बचाव हेतु 160 मि.ली. क्लोरपाईरिफॉस 20 ई.सी. को 2 कि.ग्रा. मिश्रित करके प्रति बीघा की दर से रोपाई से पहले खेतों में डालें| 

  5. अक्टूबर महीने में रोपी फूलगोभी, बन्दगोभी, ब्राक्ली तथा चाईनीज बन्दगोभी फसलों में निराई-गुड़ाई करें तथा 3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन प्रति बीघा डालें| 

  6. अक्टूबर महीने में बीजाई की गई जड़दार सब्जियों जैसे मूली, गाजर, शलजम इत्यादि में घने पौधों की छंटाई करें तथा पौधों से पौधों की दूरी 5-7 सैं.मी. बनाये रखें| 

  7. इस महीने भी मूली, गाजर, शलजम, पालक, मेथी, सब्जियों की सीधी बीजाई पंक्तियों में 25-30 सैं.मी. की दूरी पर की जा सकती है| 

  8. अक्टूबर महीने में बीजी गई पत्तेदार सब्जियों जैसे पालक, मेथी, इत्यादि में पत्तों की कटाई करने के उपरान्त गुड़ाई करें तथा 3-4 कि.ग्रा. यूरिया या 6-8 कि.ग्रा. कैन प्रति बीघा फसल में डालें| कटाई करने के उपरान्त सिंचाई करना फसल की शीघ्र बढ़ौतरी के लिए लाभदायक होता है| 

  9. महीने के दूसरे पखवाड़े तक लहसुन की सुधरी प्रजातियों जैसे जी.एच.सी. 1 तथा एग्रीफाऊंड पार्वती की सीधी बीजाई भी पंक्तियों में 20 सैं.मी. तथा पौधों में 10 सैं.मी. की दूरी पर की जा सकती है| 

  10. आलू की फसल में बीज अंकुरण के उपरान्त निराई-गुड़ाई करें तथा खरपतवार निकाल दें| 

  11. प्याज की सुधरी किस्मों (नासिक रैड, पटना रैड, एग्रीफाऊंड लाईट रैड, एग्रीफाऊंड डार्क रैड तथा ब्राऊन स्पेनिश इत्यादि की पनीरी दें| पनीरी उगाने के लिए तीन मीटर लम्बी, एक मीटर चौड़ी तथा 10-15 सैं.मी. ऊंची क्यारी में 20-25 कि.ग्रा. गोबर की गली-सड़ी खाद, 200 ग्रा. सिंगल सुपर फास्फेट, 20-25 ग्रा. थीमेट/फोलीडाल धूल मिट्टी की ऊपरी सतह में मिलाने के उपरान्त उपचारित बीज (बैविस्टीन 2.5 ग्राम प्रति कि.ग्रा. बीज) को पंक्तियों में 5 सैं.मी. की दूरी पर पतली बीजाई करें| 

मध्य पर्वतीय क्षेत्र:

  1. प्याज की सुधरी प्रजातियों जैसे नासिक रैड, पूसा पटना रैड, ए.एफ.डी.आर, ए.एफ.एल.आर तथा ब्राऊन स्पेनिश इत्यादि की पनीरी दें| 

  2. लहसुन की सुधरी प्रजातियों (जी.एच.सी. 1, एग्रीफाउंड पार्वती) की बीजाई में 20 सैं.मी. तथा पौधों में 10 सैं.मी. की दूरी पर करें| 

  3. मटर की सुधरी प्रजातियों (लिंकन, आज़ाद पी.1 पालम प्रिया) की बीजाई 45-60 सैं.मी. कतारों तथा 10 सैं.मी. पौधों से पौधों की दूरी पर करें| 

  4. प्याज के बीजोत्पदन के लिए स्वस्थ तथा पतली गर्दन वाले कन्दो की रोपाई 45x45 सैं.मी की दूरी पर करें| खेत तैयार करते समय 8-10 क्विंटल गोबर की गली-सड़ी खाद तथा कन्दों की रोपाई के समय 12 कि.ग्रा. कैन, 25 कि.ग्रा. सुपर फास्फेट तथा 7 कि.ग्रा. म्यूरेट ऑफ पोटाश प्रति बीघा खेतों में डालें| 

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