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चायनीज सरसों


चायनीज सरसों एक हरी पत्तेदार सब्जी फसल है। यह दो प्रकार की होती है, ठोस शीर्षे व खुले पत्तों वाली किस्म को चायनीज सरसों के नाम से पुकारा जाता है क्योंकि इसके पत्तों को सरसों के पत्तों की तरह ही पकाया जाता है । पर्वतीय क्षेत्रों में अन्य हरी सब्जियों (पालक व मेथी) की अपेक्षाकृत यह कम समय में अध्कि पैदावार देती है। पिछले कुछ वर्षो से इसकी मांग धीरे-धीरे बढ़ रही है। ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों म भी यह उत्तम पाई गई है।

उन्नत किस्में:


सोलन सलैक्शन: पत्ते कोमल, हल्के हरे और फूले हूए डंठल, मध्य पर्वतीय क्षेत्रा के लिए उपयुक्त । औसत उपज 150-190 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर ।


पालमपुर ग्रीन : पत्ते गहरे हरे रंग तथा लगभग बंदगोभी के पत्तों की तरह गोलाई लिए हुए, पत्तों के डण्ठल काफी बड़े, फूले हुए, कोमल तथा दूध्यिा रंग के, फूल के डण्ठल प्रक्रिया काफी विलम्ब से, सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त । औसत उपज 300-400 किवटल प्रति हैक्टेयर ।


सोलन बन्द सरसों : बन्द वाली किस्म, लम्बे व ठोस बन्द, बजन 700-1100 ग्राम प्रति बन्द, 6-9 बाहरी पत्ते, 120 दिन में तैयार, पत्ते हल्के झुरींदार, कोर हल्के सुनहरी रंग का, अच्छे परिवहनीय गुण, सलाद तथा पकाने के लिए उपयुक्त, औसतन पैदावार 400 किवटल प्रति हैक्टेयर ।

 

उन्नत किस्में :


  प्रति हैक्टेयर प्रति बीघा प्रति कनाल
बीज(ग्राम) 600-750 50-60 25-30
गोबर की खाद (क्विंटल ) 200 16 8
विधि -1
यूरिया ( किलो ग्राम) 200 16 8
सुपरफास्फेट ( किलो ग्राम ) 300 24 12
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 50 4 2
विधि- 2
12.32.16 मिश्रित खाद (किलो ग्राम ) 156 12.5 6.3
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 8.8 0.70 0.4
यूरिया ( किलो ग्राम) 175 14 7

 

विधि1: गोबर की खाद खेत की तैयारी के समय मिला लें। सुपर फास्फेट व पोटाश की सारी मात्रा व यूरिया की आध्ी मात्रा रोपाई के समय खेतों में मिला लें। शेष यूरिया खाद रोपाई के एक-एक महीने के अन्तराल पर फसल में डालें।


विधि2: गोबर की खाद, 12ः32ः16 मिश्रित खाद व मयूरेट आॅफ पोटाश की सारी मात्रा खेत तैयार करते समय डालें । यूरिया खाद को दो बराबर हिस्सों में एक-एक महीने के अन्तराल पर फसल में डालें ।

 

 

बिजाई एवम् रोपाईः


चायनीज सरसों की पौध् तैयार की जाती है। नर्सरी बीजाई का उचित समय इस प्रकार हैः-


निचले क्षेत्र: अगस्त-अक्तूबर
मध्य क्षेत्र जुलाई-अक्तूबर
(अध्कि वर्षा वाले क्षेत्रों में केवल सितम्बर)
ऊचे क्षेत्र अप्रैल, जून

 

लगभग 4 सप्ताह में पौध् तैयार हो जाती है। तथा इसकी 45*30 सैंटीमीटर की दूरी पर रोपाई करके तुरन्त सिंचाई कर दें।

सस्य क्रियायें:


चायनीज सरसों के लिए सभी सस्य क्रि याएं लगभग गोभी वर्गीय सब्जी फसलों की तरह है।

कटाई व उपज:


रोपाई के लगभग 4 सप्ताह बाद पत्तों को पहली बार निकाला जा सकता है इसके पश्चात् हर 10-15 दिन के अन्तराल पर पत्तों को निकालते रहें। बाहरी पत्तों को हाथ से तोड़ कर बंडल बनाकर बांध्े। यदि दराती से पालक की तरह काटा जाये तो अगली कटिंग देर में आयेगी ।

बीजोत्पादन:


चायनीज सरसों का बीज सभी क्षेत्रों में पैदा किया जा सकता है। यह परपरागी फसल है इसलिए किन्हीं दो प्रजातियों या शलजम के बीच प्रमाणित बीज उत्पादन हेतु कम से कम 1000 मीटर की दूरी अवश्य रखें। दो-तीन कटिंग लेने के उपरान्त पौधें को बीज के लिए छोड़ दें। अवांछनीय पौधें को समय पर निकाल दें। जब फलियां भूरी-पीली हो जाये तो शाखाओं के साथ काट कर ढेर में पूर्ण परिपक्व होने दें तथा सूखने पर बीज निकाल कर सुखा लें।


बीज उपज प्रति हेक्टर प्रतिबीघा प्रतिकनाल
किलो ग्राम 500-600 40-48 20-24


पोध संरक्षण


लक्षण

उपचार

 

बीमारिया 

 
पौधे कमर तोड़: पौधे बीज से निकलते ही या बाद में मर जाती है तथा भूमि पर गिर जाती है। 1-2 जैसी टमाटर में
3. हमेशा ग र्म पानी व स्ट्रैप्टोसाईक्लिन से उपचारित बीज पौध्शाला में लगायें।
ब्लैक राॅट : पत्ते के संक्रामित स्थानों की पत्तियां पीली हो जाती हैं तथा ‘वी’ आकार के बिना हरे रंग के नीचे से ऊपर की ओर बढ़ जाती हैं। पौधे के पत्ते की मुख्य तथा अन्य शिरायें गहरे रंग की हो जाती है। प्रभावित फूल भूरे से काले पड़ने लगते है और सड़ जाते है।

बीज को 30 मिन्ट तक पानी में रखें और बाद में (50 सेल्सियस तापमान)पानी में रखें । इतने ही समय तक स्ट्रैप्टोसाईक्लिन (1 ग्राम/10 लीटर पानी) मिश्रण में रखें । फूल बनने पर 15 दिन के अन्तराल पर स्ट्रैप्टोसाईक्लिन (1 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव करें।


नोट: बीज का उपचार सब्ज़ी उत्पादक/ किसान विश्व विद्यालय/ क्षेत्रीय अनुसन्धन प्रयोगशलाओं से बिना किसी खर्च के करवा सकते हैं।

कर्डराट (फूल सड़न) : फूल का सड़ना कहीं से भी शुरू हो सकता है। सामान्यतः फूल घाव से ही सड़ने लगते है। 1. पाला पड़ने से पूर्व सुरक्षात्मक छिड़काव मैनकोजैब या इंडोफिल एम-45 (25 ग्रा .म / 1 0 लीटर पानी) और स्ट्रैप्टोसाईक्लिन (1 ग्राम/10 लीटर पानी) के घोल का फूलों पर छिड़काव करें। इस छिड़काव को दो बार 8-10 दिनों के अन्तराल पर भी करें।
2. फूल के ग्रसित भागों को चाकू से अलग कर दें तथा वहां बोर्डो मिश्रण (80 ग्राम नीला थोथा, 80 ग्राम चूना और 10 लीटर पानी) अथवा काॅपर आसीक्लोराईट या ब्लाईटॅक्स 50 (30 ग्राम/10 लीटर पानी) का लेप लगा दें।
स्टाक राट: पत्तों की चमक समाप्त हो जाती है तथा गिर जाते हैं। तने अन्दर से सड़ कर खोखले तथा काले हो जाते है। फूल वाले कल्लों पर पनीले ध्ब्बे प्रकट होते है। जो चांदी जैसे हो जाते है। और मुरझा जाते है अतः फलियां नहीं बनती। 1. फूलगोभी-धन का फसल चक्र अपनायंे।
2. रोगी पत्तों को नष्ट कर दें।
3. फसल पर फूल बनने से बीज बनने तक 10-15 दिन के अन्तराल पर बैविस्टीन (5 ग्राम/10 लीटर पानी) और मैनकोजैब या इंडोफिल एम-45 (25 ग्राम/10 लीटर पानी) के घोल का छिड़काव करें।
डाऊनी मिल्डयू: इससे फूल सड़ जाते है। गला-सड़ा भाग भूरा तथा किनारे काले हो जाते है। पत्तों पर भी विशेष प्रकार के ध्ब्बे पड़ जाते है।

फसल पर रिडोमिल एम जैड(25 ग्राम प्रति 10 लीटर प्रति पानी) या मैनकाजैब या इंडोफिल एम-45 (25 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव रोग प्रकट होते ही तथा बाद में 10-15 दिन के अन्तराल पर भी करते रहें।

 

मृदशेमित्रा रोग : रोग से पत्तों पर ध्ंध्ले हरे से पीले-भूरे काले ध्ब्बे पड़ जाते है। पौध्शाला की क्यारियों में रिडोमिल एम जैड (25 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव करें।
एकीकृत छिड़काव सारणी-

 

 

फूलगोभी वर्गीय फसलों के लिए

 

 

क) बुआई के पूर्व . क्यारियों को बुआई के 20 दिन पूर्व फार्मलीन (1 भाग फार्मलीन और 7 भाग पानी) द्वारा शोध्ति करें। 2. बीज को 30 मिनट तक पानी में भिगोने के बाद 30 मिनट तक गर्म पानी (52 डि॰ सेल्सियस)में भिगो लें तथा पुनः 30 मिनट तक स्ट्रैप्टोसाईक्लिन (1 ग्रा./10 लीटर पानी) घोल में रखें।
ख ) अंकुरण के बाद कमर तोड़ और जड़ गलन होने पर क्यारियों को मैनकोजब या इंडोफिल एम-45 (25 ग्राम/10 लीटर पानी) और कार्बण्ड़ाजिम या बैविस्टीन (5ग्राम/10 लीटर पानी) के घोल से सींचे।
ग) रोपण उपरान्त

मिट्टी चढ़ाने के एक सप्ताह बाद फसल पर कार्वेण्डाजिम या बैवस्टिीन-50 (5 ग्राम/10 लीटर पानी) का छिड़काव करें। पुनः 15 दिन बाद ऐसा ही और छिड़काव करें।

 

घ) फूल बनने शुरू होने पर 1. मैनकोजैब या इंडोफिल एम-45 (25 ग्रा / 1 0 लीटर पानी) अ ा ैर स्ट्रैप्टोसाईक्लिन (1 ग्राम/10 लीटर पानी) का सुरक्षात्मक छिड़काव करें तथा एक और छिड़काव 8-10 दिन बाद करें। 2. रोगी पत्तों को नष्ट कर दें।
3. छोटे रोगी भागों को चाकू से काट दें तथा वहां बोर्डो मिश्रण (;80 ग्रा. नीला थोथा, 80 ग्रा. चूना और 10 लीटर पानी) अथवा कापर आक्सीक्लोराईड या ब्लाईटाक्स-50 (30ग्रा./10 लीटर पानी) का लेप लगा दें।
ड) फूल बनने से फली बनने तक

फसल पर 5 ग्राम कार्बेण्डाजिम या बैविस्टीन-50 और 25 ग्राम मैनकोजैव या इंडोफिल एम-45 को 10 लीटर पानी में घोलकर 10-15 दिन के अन्तराल पर छिड़के।

 


कीटः

 

 
गोभी का तेला: दिसम्बर से मार्च में पत्तों की निचली सतह पर हरे रंग के छोटे कीट जिस पर राख जैसा चूर्ण होता है, प्रकट होते हैं। पौध्े अस्वस्थ लगते हैं तथा इनके पत्तें मुड़ जाते हैं। फूल गोभी की बीज वाली फसल मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में मध्य फरवरी से जून तक इन कीटों से प्रभावित रहती है। तेला पत्तों तथा फूलों से रस चूसता है, अतः बीज कम बनता हैं।

1. फूल वाली फसल पर मैलाथियान (750 मि. ली. साईथियान/मैलाथियान 50 ई. सी. प्रति 750 लीटर पानी) का छिड़काव प्रति हैक्टेयर करें। इस छिड़काव को हर 15 दिन बाद करते रहें। फूल तोड़ने के सात दिन पहले फसल पर छिड़काव न करें। 2. बीज वाली फसल पोधो के किनारे पर मिटटी मे फारे टे (15 कि. ग्राम . थीमटे या फारे टे 10 जी प्रत्ति हेक्टेयर) के दाने मिलाये या फसल पर मिथाइर्ल डैि मटान (750 मि. ली. मटैासिस्टाक्स 25 इ. सी.) या फास्फामिडान (250 मि. ली. डाइर्म क्रेान 100) को 750 मि. ली. डाइर्म क्रेान 100) को 750 ली. पानी घोलकर तेले के फूल पर आने पर प्रत्ति हेक्टेयर छिडक़ाव करे यदि आवश्यकता हो तो पनु : छिडक़ाव करे|

 

कैटरपिल्लर: बन्दगोभी का कैटर पिल्लर, सेमी लूपर, डायमंड बैक पाथ, फलछेदक व सुंडियां मध्य फरवरी से पत्तियां खाकर हानि पहुँचाते है। उन्दगोभी काकैटरपिल्लर शुरू में बहुत हानि करता है। फलछेदक कीट फूल निकलने और फली बनने पर आक्र मण करता है।

1. सफेद भृगों की सुंडियों व पीले अण्डो को चुन कर नष्ट कर दें। 2. 750 मि. ली. मैलाथियान 50 ई. सी. या 375 मि. ली. न्यूवान 100 को 750 लीटर पानी में घोल बनाकर प्रति हैक्टेयर छिड़काव करें। बीज वाली फसल पर कैटरपिल्लर प्रकट होने पर 1 लीटर थायोडान/हिलडान/एण्डोसिल 35 ई. सी. का 750 लीटर पानी प्रति हैक्टेयर छिड़काव करें या 350 मि. ली. सुमीसिडीन/एग्रोफेन 20 ई. सी. या 225 मि. ली. साईम्बुश 25 ई. सी. या 750 मि. ली. डैसिज 2.8 को 750 ली. पानी में घोलकर प्रति हैक्टेयर छिड़के।

 

पेंटिड बग: शिशु एवम् प्रौढ पौधें के पत्तों और फलियों मंे रस चूसते है जिससे बीज सिकुड़ जाता है और उपज में कमी आती है। मोनोक्रोटोफास (375 मि. ली. न्यूवाक्रान 40 ईसी) या 750 मि. ली. मैटासिस्टाक्स 25 ईसी को 750 ली. पानी में घोल कर प्रति हैक्टेयर छिड़के ।
सावधनी 1.
बीज वाली फसल में अवांछनीय पौधें को छिड़काव से पहले ही उखाड़ दें।
2. फूल आने पर छिड़काव शाम के समय करें तथा समीप में स्थित मौनगृह के द्वार दूसरे दिन बन्द रखें।
लाल चींटी : कई स्थानों पर लाल चींटियों का आक्रमण पाया गया है। नव-रोपित पौधें की रोयेदार जड़ों और छाल पर कीड़े पलते है और प्रभावित पौधे सूख कर मर जाते है। रोपाई के समय 2 ली. क्लोरपाईरिफास 20 ई. सी. को 25 कि. ग्रा. रेत में मिलाकर प्रति हैक्टेयर की दर से खेतों में डालें।

दैहिक विकार:

 

 

फूलगोभी:

 

 

बटनिंग तथा राईसीनेस: अध्कि आयु की पौध् व नत्राजन चूना सुहागा तथा मैलिबिडनम की कमी के कारण फूलगोभी बटन के समान रह जाती है। 1. अपने परिपक्कता के वर्ग वाली किस्में लगायें।
2. नत्राजन, फास्फोरस, चूना और सुहागे की अनुमोदित मात्रा का प्रयोग करें।
3. शुद्व बीज का प्रयोग करें।
4. फसल को ठीक समय पर बीजें तथा तुड़ाई करें।
भूरी व लाल सड़न: सुहागा की कमी के कारण फूलगोभी पर पनीले स्थान बन जाते हैं। फूलगोभी की सतह पर गुलाबी या लाल-भूरा रंग आ जाता है तथा उसका स्वाद कड़वा हो जाता है बोरेक्स या सोडियम बोरेट को 20 कि. ग्रा. प्रति हैक्टेयर की दर से मिट्टी में मिलाएं। अध्कि अभाव की स्थिति में 0.25-0. 5% बोरेक्स के घोल का छिड़काव करें।
व्हिप टेल: मौलिबिडनम के अभाव के कारण पत्ते हरे रंग के बिना सफेद हो जाते है व मुड़ कर सूख जाते हैं। पुराने पौधें के किनारे अनियमित आकार के हो जाते है और कभी-कभी पत्ते की केवल मुख्य धरी ही रह जाती है जिसके फलस्वरूप इसका व्हिप टेल नाम पड़ा । नत्राजन की अनुमोदित मात्रा डालें या 0.5% यूरिया और 0.1% अमोनियम मौलिबिडेट के घोल का छिड़काव करें।
ब्लाईडनैस: पौधे बिना शिखर कली के होते हैं। पत्ते बड़े, मोटे व गहरे रंग के हो जाते हैं। बहुत ठण्ड पड़ने पर ऐसा होता है । शिखर कली को कीटों से तथा खेतों में कार्य करते समय पौधें को होने वाले नुकसान से बचाएं।
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Visitor No.: 08609426   Last Updated: 13 Jan 2016