घरहमसे संपर्क करेंनौकरी प्रोफाइलनिविदा सूचनाबजटसूचना का अधिकार अधिनियमअधिनियम और नियमविक्रेताG2G Loginमुख्य पृष्ठ     View in English    
  कृषि के ऑनलाइन पोर्टल में आपका स्वागत है    
मुख्य मेन्यू
हमारे बारे में
उपलब्धियां
कार्य योजना
महत्वपूर्ण क्षेत्र
कार्य
लक्ष्य
गैलरी
संगठनात्मक संरचना
कृषि जलवायु क्षेत्र
शिकायत निवारण सेल
अभ्यास का पैकेज
52 सप्ताह हेतु कृषि कार्यों की रुपरेखा
भूमि उपयोग के तरीके
एन.बी.एम.एम.पी.
अन्य उपयोगी लिंक
कृषि मोबाइल पोर्टल
अभ्यास का पैकेज

पार्सले

यह अध्कितर सब्जियों को सुगन्ध्ति, सुशोभित करने व सलाद के लिए प्रयोग में लाई जाती है। यह भोजन पचाने तथा प्याज की गन्ध् कम करने में सहायता करता है। पार्सले विटामिन ‘ए’ व ‘सी’ कैल्शियम और प्रोटीन जैसे पोषक तत्वों का काफी अच्छा स्त्रोत है। इनके अतिरिक्त पोटाशियम, लोहा, सोडियम व फास्फोरस भी इसमें पाए जाते हंै । दिन प्रतिदिन बढ़ती हुई जरूरतों को पूरा करने के लिए प्रदेश के मध्यवर्ती व ऊंचाई वाले क्षेत्रो का जलवायु इस फसल की खेती के लिए उपयुक्त है ।

किस्में:

कर्लड लीफ, डबल कर्लड, मास कर्लड चैम्पियन

निवेश सामग्री:

  प्रति हैक्टैयर प्रति बीघा प्रति कनाल
बीज (ग्रा.) 250 20 10
गोबर की खाद (क्विंटल ) 150 12 6
विधि -1
यूरिया ( किलो ग्राम) 120 9.5 4.5
सुपरफास्फेट ( किलो ग्राम ) 240 19 9
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 45 3.5 17
विधि- 2
12.32.16 मिश्रित खाद (किलो ग्राम ) 125 10 5
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 16 1.5 0.70
यूरिया ( किलो ग्राम) 98 8 4
नोट: गोबर की खाद खेत तैयार करते समय मिट्टी में मिलानी चाहिए ।
विधि1: रेापाई के समय सुपर फास्फेट व पोटाश की सारी मात्रा व यूरिया की आधी मात्रा खेतों में मिला लें। शेष यूरिया खाद को दो बार एक -एक महीने के अन्तराल पर डालें।
विधि2: 12ः32ः16 मिश्रित खाद व म्यूरेट आफॅ पोटाश की सारी मात्रा खेत तैयार करते समय डालें। यूरिया खाद को दो बार एक-एक महीने के अन्तराल पर डालें।

नर्सरी बीजाई का

निचले क्षेत्र अक्तूबर
मध्य क्षेत्र अगस्त-सितम्बर
ऊंचे क्षेत्र मार्च -अप्रैल
पहले क्यारियां बना कर इसकी पौध् तैयार की जाती है। एक हैक्टेयर के लिए लगभग 40-45 वर्ग मीटर पौध् क्षेत्रा पर्याप्त होगा। बीजाई से पहले बीजों को 24 घण्टे तक पानी में भिगोना चाहिए । क्यारियों में बीजाई 5-7 सै. मी. की दूरी पर कतारों में करें। खाद उर्वरकों का प्रयोग पालक की फसल की तरह करें।

बीजाई एवं रोपाई :

पार्सले के पौध् की रोपाई समतल क्यारियों में 45*10 सैंटीमीटर के अन्तर पर करनी चाहिए। औसत उपज 100-125 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर (8-10 क्ंिवटल प्रति बीघा अथवा 4-5 क्ंिवटल प्रति कनाल) है।

बीजोत्पादन:

पर-परागित फसल होने के कारण शुद्व व उत्तम बीजोत्पादन के लिए अत्याध्कि सावधनी प्रयोग में लानी चाहिए क्योंकि पार्सले की किस्में दो प्रकार ही होती है । सीधे पत्तों वाली व मुड़े हुए पत्तों वाली । इसलिए बीजोत्पादान के लिए एक तरह के पत्तों वाली किस्मों के बीज 500 मीटर तथा सीधे व मुड़े हुए पत्तों वाली किस्मों में 1000 मीटर की दूरी रखनी चाहिए। अवांछनीय पौधें को समय-2 पर निकालते रहें।

पार्सले के बीज पकने पर आसानी से गिर जाते हैं, इसलिए बीजों के गुच्छों को पूर्णतः पकने से पहले काट लेना चाहिए । बीजों को अच्छी तरह साफ करके व सुखाकर भण्डारण करें। औसत बीज उपज लगभग 800 कि. ग्रा. प्रति हैक्टेयर (65 कि. ग्रा. प्रति बीघा) है।

मुख्य पृष्ठ|उपकरणों का विवरण|दिशा निर्देश और प्रकाशन|डाउनलोड और प्रपत्र|कार्यक्रम और योजनाएं|घोषणाएँ|नीतियाँ|प्रशिक्षण और सेवाएँ|रोग
Visitor No.: 08609367   Last Updated: 13 Jan 2016