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पालक


पालक निचले तथा मध्य क्षेत्रों में लगभग वर्ष भर उगाया जाता है। इसमें अध्कि मात्रा में विटामिन ए, सी तथा लोहा पाया जाता है।

उन्नत किस्में:

पूसा हरित : पौधे सीधे, पत्ते हरे लम्बे मोटे और अध्कि दिनों के बाद फूलने वाले। निचले एवं मध्य क्षेत्रों में लगभग वर्ष भर उगाए जाने के लिए उपयुक्त किस्म। औसत उपज 150-200 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर

बैनर्जी जायंट: आम पालक से दुगने बड़े पत्ते। सभी क्षेत्रों के लिए उपयुक्त किस्म औसत उपज 150-190 क्ंिवटल प्रति हैक्टेयर।

 

 

निवेश सामग्री :

 

बीज मात्रा (किलो ग्राम) 25-30 1-1.2 गा्.गोबर की
गोबर की खाद (क्विंटल ) 200 8 4
विधि -1
यूरिया ( किलो ग्राम) 150 12 6
सुपरफास्फेट ( किलो ग्राम ) 315 25 12.5
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 50 4 2
विधि- 2
12.32.16 मिश्रित खाद (किलो ग्राम ) 156 12.5 6.3
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 9 0.70 0.40
यूरिया ( किलो ग्राम) 12.25 10 5

 

बीजाई का समय:

निचले क्षेत्र जुलाई-नवम्बर फरवरी-मार्च
मध्य क्षेत्र जुलाई-अक्तूबर, फरवरी-अप्रैल
ऊंचे क्षेत्र मार्च-जून

 

अन्तर:

 

30*5-10 सैंटीमीटर:

 

सस्य क्रियाएं:

जमीन तैयार करते समय गोबर की खाद अच्छी तरह मिट्टी में मिला दें।

विधि1 बीजाई के समय सुपर फास्फेट व पोटाश की सारी मात्रा व यूरयिा की आध्ी मात्रा खेतों में मिला लें । शेष यूरिया खाद को दो बार एक-एक महीने के अन्तराल पर डालें।

विधि 2 12ः32ः16 मिश्रित खाद व म्यूरेट आॅफ पोटाश की सारी मात्रा खेत तैयार करते समय डालें। यूरिया खाद को दो बार एक-एक महीने के अन्तराल पर आधी-2 मात्रा में डालें। गर्मियों में 5-6 दिन के अन्तराल पर तथा सर्दियों में 8-10 दिन के अन्तराल पर दो या तीन बार निराई-गुड़ाई करें और अंकुरण के 10-20 दिन बाद ज्यादा घने पौधें को निकाल कर पौधे में 5-10 सैं. मी. का अन्तर रखें।

फसल की कटाई:

मौसम एवम् किस्म के अनुसार पूरी अवध् िमें पालक 3-6 बार काटी जाती है। फसल बोआई के लगभग 30-40 दिनों में पहली कटाई के लिए तैयार हो जाती है । अगली कटाईयां 15-20 दिन के अन्तराल पर की जाती है।

 

उपज (क्ंिवटल):

प्रति हैक्टेयर प्रति बीघा प्रति कनाल
150-200 12-16 6-8

 

बीजोत्पादन:

यह एक परपरागित फसल है और इस में परागण वायु से होता है अतः बीज उत्पादन के लिए दो किस्मों या चुकन्दर या स्विस चार्ड से कम से कम 1000 मीटर का अन्तर होना आवश्यक है। अवांछनीय पौधें को कम से कम दो बार फूल आने से पहले एवम् फूल आने के बाद निकालना आवश्यक है। बीज खेत में बथुआ कतई नहीं होना चाहिए। बीज फसल के लिए बीजाई, सामान्य समय सितम्बर-अक्तूबर में करें तथा कतारों और पौधें में फासला क्रमशः45 सै.ं मी. और 10-15 सैं. मी. रखें।

बैनर्जी जायंट का बीज उत्पादन मैदानी क्षेत्रों में किया जाता है । जबकि पूसा हरित का बीज उत्पादन केवल ऊंचे या मध्य क्षेत्रों में ही सम्भव है। बीज तैयार करने के लिए फसल को तीसरी कटाई के बाद छोड़ दिया जाता है। जब पूरी फसल पक जाए तभी इसकी कटाई करें और 5-7 दिन के लिए ध्ूप में सुखाएं । इसके बाद डण्डे इत्यादि से पीट कर बीज अलग किया जाता है और अच्छी तरह से सुखा कर भण्डारण किया जाता है।

 

 

बीज उत्पादन:

प्रति हैक्टेयर प्रति बीघा प्रति कनाल
6-8 क्ंिवटल 48-64 कि. ग्रा. 24-32 कि. ग्रा.
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