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लैट्यूस

पत्तेदार सलाद सब्जियों में लैट्यूस का एक महत्वपूर्ण स्थान है। इसमें पौष्टिक तत्व जैसे विटामिन और लवण पर्याप्त मात्रा में पाये जाते है। अब जैसे-जैसे लोगों में भोजन के साथ सलाद शामिल करने के गुण की जानकारी बढ़ रही है वैसे ही इस फसल को उगाने की भी किसानों को जिज्ञासा हो रही है।

उन्नत किस्में:

अलामो-1: यह पत्तगोभी की तरह शीर्ष बनाने वाली गहरे रंग की किस्म है। औसत उपज 200-235 किवटल प्रति हैक्टेयर ।
सिंपसन ब्लैक सीडिड: पत्तें लम्बे, हरे रंग के बड़े पत्ते कड़वाहट वाले। औसत उपज200 किवटल प्रति हैक्टेयर ।
अेवज़ वंडर: यह भी शीर्ष बनाने वाली हरे रंग की किस्म है। पत्ते नरम व कड़क होतेे हैं
रूबी: यह खुले जामुनी रंग के पत्तों वाली किस्म है।

निवेश सामग्री:

  प्रति हैक्टैयर प्रति बीघा प्रति कनाल
बीज (कि. ग्रा.) 400-500 32-40 16-20
गोबर की खाद (क्विंटल ) 100 8 4
विधि -1
यूरिया ( किलो ग्राम) 125 10 5
सुपरफास्फेट ( किलो ग्राम ) 250 20 10
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 65 5 2.5
विधि- 2
12.32.16 मिश्रित खाद (किलो ग्राम ) 125 10 5
म्यूरेट ऑफ़ पोटाश (किलो ग्राम) 34 2.7 1.4
यूरिया ( किलो ग्राम) 98 8 4
नोट : खादों का प्रयोग पालक की तरह ही करें।

बीजाई का समय:

निचले क्षेत्र सितम्बर-नवम्बर
मध्य क्षेत्र सितम्बर-अक्तूबर
ऊंचे क्षेत्र मार्च-जुलाई

फसल लगाने की विधि

लैट्यूस की सर्वप्रथम स्वस्थ पौध् तैयार की जाती है। तत्पश्चात पौध् की रोपाई 45*30 सैं. मी. के अन्तर पर कर दी जाती है।

सस्य क्रियाएं: मूली की तरह

अन्य पत्तेदार सब्जियों की तरह ही करें।

फसल की तुड़ाई व उपज:

खुले पत्तों वाली किस्मों में तब तुड़ाई शुरू करें जब पत्तों का आकार ठीक हो जाए लेकिन नर्म हो। शीर्ष बनाने वाली किस्मों में तब तुड़ाई करनी चाहिए जब शीर्ष का अनुरूप ठीक हो तथा बन्द गोभी की तरह ठोस हों।

बीज उत्पादन :

एक या दो बार पत्ते तोड़ने के पश्चात् फसल को बीज उत्पादन के लिए छोड़ दें। दो जातियों के मध्य लगभग 25 मीटर का अन्तर रखें। शीर्ष बनाने वाली किस्मों में शीर्ष के ऊपर दो तीन पत्ते हाथ से निकाल देने चाहिए या फिर चाकू से शीर्ष के ऊपर क्र ास बना दें। इससे बीज तना निकलने में आसानी हो जाएगी। फूल एक समय पर न आने के कारण बीज इक्ट्ठा नहीं पकता । इसलिए लगभग 75ः फूलों के गुच्छे सफेद होने पर कटाई करें। काटी हुई फसल को धूप मे सुखा कर बीज निकालें। बीज को अच्छी तरह साफ तथा सुखा कर ही भण्डारण करें।
बीज उपज 100-120 किलोग्राम प्रति हैक्टेयर
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